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राष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर बड़ा बदलाव! CISF ने अहम प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए लागू की 'फंक्शनल कमांड' प्रणाली, जानें क्यों पड़ी इसकी जरूरत

 Reported By: Abhay Parashar,  Written By: Vinay Trivedi
 Published : Nov 01, 2026 06:33 pm IST,  Updated : Nov 01, 2026 07:18 pm IST

CISF ने महत्वपूर्म प्रतिष्ठानों की सिक्योरिटी के लिए 1 नवंबर 2026 से भौगोलिक क्षेत्र के बजाय उद्योग की प्रकृति पर आधारित ‘फंक्शनल कमांड’ सिस्टम लागू किया है। इसके बारे में यहां विस्तार से जानें।

CISF- India TV Hindi
CISF ने अत्यधिक विशेषज्ञता वाली 'कार्यात्मक' सेक्टर प्रणाली लागू कर दी है। Image Source : REPORTERS INPUT

आज के दौर में युद्ध केवल सीमाओं पर नहीं लड़े जाते। दुश्मन, देश पर कब्जा किए बिना भी हमारे पावर ग्रिड, ऑयल रिफाइनरी या बंदरगाहों को निशाना बनाकर पूरे सिस्टम को पंगु बना सकता है।  इसी आधुनिक चुनौती से निपटने और 'विकसित भारत' के अहम औद्योगिक ढांचे को अभेद्य बनाने के लिए, CISF ने 1 नवंबर 2026 से अपनी सुरक्षा रणनीति में एक अहम बदलाव किया है। गृह मंत्रालय की मंजूरी के साथ, CISF ने अपनी पुरानी 'भौगोलिक क्षेत्र आधारित' (टेरिटोरियल) कमांड प्रणाली को खत्म कर एक नई और अत्यधिक विशेषज्ञता वाली 'कार्यात्मक' (फंक्शनल) सेक्टर प्रणाली लागू कर दी है।

क्या है यह नया बदलाव और इसकी जरूरत क्यों पड़ी?

पुरानी व्यवस्था में CISF का एक ही सेक्टर मुख्यालय अपने इलाके की 50 से अधिक अलग-अलग तरह की इकाइयों की सुरक्षा देखता था। यानी एक ही अधिकारी कोयला खदानों, बिजली संयंत्रों और बंदरगाहों- सबकी निगरानी कर रहा था। लेकिन एक कोयला खदान की सुरक्षा चुनौतियां किसी हाई-टेक बंदरगाह से बिल्कुल अलग होती हैं। ड्रोन हमले, साइबर-अटैक (OT/ICS) और सुनियोजित तोड़फोड़ जैसे आधुनिक खतरों से निपटने के लिए एक ऐसी लीडरशिप चाहिए थी, जो उस खास उद्योग की तकनीकी बारीकियों को गहराई से समझती हो। इसी बात को ध्यान में रखते हुए, अब सेक्टर का बंटवारा इलाके के आधार पर नहीं, बल्कि प्रतिष्ठान की प्रकृति के आधार पर किया गया है। 

आज से देश भर में ये नए फंक्शनल कमांड काम करना शुरू कर देंगे:

  1. पावर (विद्युत) सेक्टर: पावर-I (नई दिल्ली) और पावर-II (कोलकाता)
  2. कोल (कोयला) सेक्टर: रांची
  3. स्टील (इस्पात) सेक्टर: भिलाई
  4. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस सेक्टर: गुवाहाटी
  5. पोर्ट (बंदरगाह) सेक्टर: वेस्ट कोस्ट (मुंबई) और ईस्ट कोस्ट (चेन्नई)
  6. सरकारी भवन, संग्रहालय, स्मारक एवं मेट्रो (GBMM & MRTS) सेक्टर: नई दिल्ली

यह प्रयोग बल के लिए नया नहीं है। विमानन (एविएशन) सेक्टर 2001 से और परमाणु/अंतरिक्ष (DAE & DoS) सेक्टर 2018 से इसी फंक्शनल मॉडल पर शानदार नतीजे दे रहे हैं। अब पूरी फोर्स को इसी सफल मॉडल के सांचे में ढाल दिया गया है।

cisf
Image Source : REPORTERS INPUTआज से देश भर में कई नए फंक्शनल कमांड ने काम करना शुरू कर दिया है।

जमीनी स्तर पर सुरक्षा और भी चुस्त, लेकिन प्रक्रियाएं यथावत

क्या इस बड़े बदलाव से गेट पर होने वाली रोजमर्रा की चेकिंग बदल जाएगी? CISF ने स्पष्ट किया है कि आम लोगों और कर्मचारियों के लिए जमीनी स्तर की सुरक्षा प्रक्रियाएं (SOPs), गश्त (पेट्रोलिंग), और क्विक रिएक्शन टीम (QRT) की तैनाती पहले की तरह ही काम करेगी। बदलाव सिर्फ 'पर्यवेक्षण' (सुपरविजन) के स्तर पर हुआ है। इससे वरिष्ठ अधिकारियों का मार्गदर्शन ज्यादा सटीक होगा और वे किसी भी खतरे के दौरान अपने खास सेक्टर के लिए तुरंत 'कंटिंजेंसी प्लान' (आपातकालीन योजना) लागू कर सकेंगे।

नेतृत्व का विजन क्या है?

इस ऐतिहासिक बदलाव के फायदों को स्पष्ट करते हुए CISF के महानिदेशक ने कहा, "यह नई व्यवस्था मल्टी-स्टेकहोल्डर वातावरण में एक गेम-चेंजर साबित होगी। पहला फायदा यह है कि अब हमारे और प्रतिष्ठान प्रबंधन के बीच तालमेल बहुत आसान हो जाएगा, क्योंकि दोनों तरफ से बातचीत के लिए एक ही 'सिंगल पॉइंट ऑफ कॉन्टैक्ट' होगा। दूसरा, जब नेतृत्व को उस उद्योग की गहरी समझ होगी, तो फैसले लेने में होने वाली देरी खत्म होगी और किसी भी संकट का तुरंत व सटीक जवाब दिया जा सकेगा। कुल मिलाकर, यह नया ढांचा बल में दक्षता, पेशेवर रवैया और जवाबदेही के नए मानक तय करेगा।"

यह बदलाव CISF को सिर्फ एक 'गार्डिंग फोर्स' से आगे ले जाकर एक इंटेलिजेंस-लेड और तकनीकी रूप से उन्नत बल बना रहा है। आधुनिक तकनीक, काउंटर-ड्रोन रणनीति और साइबर-फिजिकल सुरक्षा के शानदार तालमेल के साथ CISF अब भारत के औद्योगिक विकास चक्र को किसी भी संभावित खतरे से सुरक्षित रखने के लिए पूरी तरह तैयार है। इससे पहले, हाल में CISF ने मुंबई एयरपोर्ट पर 1.83 करोड़ रुपये के तीन अंडाकार पदार्थ बरामद किए थे।

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