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कोरोना: ओमिक्रॉन के ज्यादातर मरीजों में नहीं होता कोई लक्षण, एक्सपर्ट ने बताया क्यों तैजी से फैलता है नया वैरिएंट

 Edited By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Dec 30, 2021 04:13 pm IST,  Updated : Dec 30, 2021 04:17 pm IST

कोरोना वायरस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के ज्यादातर मरीजों में कोई लक्षण नज़र नहीं आता है। एक्सपर्ट ने बताई इसके तेजी से फैलने की वजह।

जानिए क्यों तेजी से फैलता है ओमिक्रॉन- India TV Hindi
जानिए क्यों तेजी से फैलता है ओमिक्रॉन Image Source : PTI

Highlights

  • ओमिक्रॉन 70 प्रतिशत मरीजों में नहीं था कोई लक्षण
  • लक्षण नहीं होने की वजह तेजी से फैलता है कोरोना का नया वैरिएंट
  • आग की तरह फैलता है कोरोना का नया स्वरूप- डॉक्टर नरेश गुप्ता

देशभर में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। दिल्ली-एनसीआर समेत कई शहरों में कोरोना की रफ्तार को काबू करने के लिए कुछ प्रतिबंध लागू किए गए हैं। दिल्ली में कोरोना के विस्फोटक रूप को देखते हुए येलो अलर्ट लागू किया गया है। बुधवार को राजधानी दिल्ली में कोरोना के 923 नए मामलों की पुष्टि हुई थी। साथ ही दिल्ली में कोरोना की पॉजिटिविटी रेट भी 1.29 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

भारत में कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के मामलों की रफ्तार ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों और डॉक्टर्स को चिंता में डाल दिया है। दिल्ली के मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर नरेश गुप्ता ने कोरोना की रफ्तार की चेतावनी देते हुए कहा, 'अब तक, सामने आए 70 प्रतिशत ओमिक्रॉन केस के मरीजों में कोई लक्षण नहीं पाया गया है। एक बार ये लोगों के बीच फैलना शुरू हो जाता है तो आग की तरह फैलता है क्योंकि आपको पता नहीं होता कि कौन-सा व्यक्ति संक्रमित हैं।'

डॉक्टर गुप्ता की मानें तो कोरोना के इस वैरिएंट के तेजी से फैलने की मुख्य वजह है कि इसके संक्रमित मरीजों में कोई लक्षण नहीं होता है। जबकि इससे पहले वाले कोरोना के वैरिएंट में मरीजों में कोई न कोई लक्षण जरूर दिखाई देता था। ऐसे में टेस्टिंग के बाद ही कोरोना संक्रमितों का पता लगाया जा रहा है। 

मेदांता अस्पताल में पल्मोनोलॉजिस्ट डॉक्टर अरविंद कुमार ने AIR के साथ खास बातचीत में बताया, 'ओमिक्रॉन का खतरा अभी तक इसलिए छोटा लगता है क्योंकि इससे किसी मरीज को गंभीर नुकसान नहीं हो रहा है। संक्रमितों के फेफड़ों में थोड़े पैचेज जरूर नज़र आ रहे हैं, लेकिन अभी इसका संक्रमण जानलेवा साबित नहीं हो रहा है। हालांकि समय के साथ परिस्थिति बदल भी सकती है क्योंकि डेल्टा वैरिएंट के मरीजों की भी शुरुआत में मौत नहीं हो रही थी, लेकिन बाद में स्थिति बेकाबू हो गई।'

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