नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) ने अंतरराज्यीय मादक पदार्थ तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए गया में फर्जी दवा फैक्ट्री का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में गिरोह के मास्टर कोऑर्डिनेटर अरुण (59) को गिरफ्तार किया गया है। अब तक इस मामले में कुल 9 कार्टेल सदस्यों की गिरफ्तारी हो चुकी है। यह कार्रवाई एफआईआर संख्या 273/25, धारा 22 एनडीपीएस एक्ट, थाना क्राइम ब्रांच के तहत की गई।
डीसीपी/एएनटीएफ संजीव कुमार यादव के नेतृत्व में, एसीपी सतेंद्र मोहन की निगरानी और इंस्पेक्टर नितेश कुमार के नेतृत्व में गठित टीम ने यह बड़ी सफलता हासिल की। पिछले सप्ताह गिरफ्तार आरोपी तनीष्क से मिली खुफिया जानकारी के आधार पर पुलिस को पता चला कि वह गया निवासी अरुण के साथ मिलकर काम कर रहा था। एसआई विकासदीप के नेतृत्व में एएनटीएफ की टीम गया पहुंची और जांच के दौरान अरुण को गिरफ्तार कर लिया गया। जांच में सामने आया कि वह बिना किसी वैध लाइसेंस के दवाइयों और वायल बनाने की फैक्ट्री चला रहा था। मौके पर गया ड्रग विभाग की टीम को भी बुलाया गया। पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में नकली दवाएं और मशीनरी जब्त की है:
जांच में खुलासा हुआ कि यह नेटवर्क अवैध रूप से ओपिओइड्स, साइकोट्रोपिक पदार्थ, नकली दवाइयां और सिरप तैयार कर फर्जी मेडिकल स्टोर्स और क्षेत्रीय सप्लायरों के जरिए बाजार में खपा रहा था। अरुण की फैक्ट्री में अवैध रूप से तस्करी कर लाया गया ट्रामाडोल पाउडर (5 किलो से अधिक, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 5 करोड़ रुपये से ज्यादा बताई गई है) प्रोसेस कर टैबलेट बनाई जाती थीं। इन टैबलेट्स को हेरोइन के विकल्प के रूप में अवैध बाजार में ऊंची कीमत पर बेचा जाता था। कच्चे माल की खरीद से लेकर निर्माण और सप्लाई तक की पूरी प्रक्रिया गैरकानूनी तरीके से संचालित की जा रही थी।

पुलिस ने बताया कि लगातार तकनीकी निगरानी, विभिन्न राज्यों में छापेमारी, हजारों किलोमीटर की यात्रा और हाई-ऑक्टेन कार चेज के बाद इस नेटवर्क का पर्दाफाश किया गया। इससे पहले पटना में भी एक फर्जी फार्मास्यूटिकल यूनिट का भंडाफोड़ किया गया था।अब तक दो फर्जी फैक्ट्रियों को ध्वस्त किया जा चुका है और 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
अरुण (59), मूल निवासी गया (बिहार), कम समय में अधिक मुनाफा कमाने के लालच में बड़े पैमाने पर अवैध दवा निर्माण में जुटा हुआ था। वह गिरोह के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर कच्चा माल मंगवाता और अपनी फैक्ट्री में ओपिओइड्स व नकली दवाएं तैयार कर अन्य राज्यों में सप्लाई करता था। क्राइम ब्रांच की एएनटीएफ टीम अन्य फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है और जांच जारी है।
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