भारत रक्षा क्षेत्र में एक नई क्रांति की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। दरअसल, हाल ही में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष में रूस के S- 400 एयर डिफेंस सिस्टम खूब चर्चा में रहा। इससे भारत ने दुश्मन देश के ड्रोन, मिसाइल और फाइटर जेट्स को तबाह कर दिए थे। अब भारत S-400 से भी अधिक शक्तिशाली और रूस के S-500 के समकक्ष एक एयर डिफेंस सिस्टम तैयार कर रहा है, जो भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए देश को तैयार करेगा। इसकी जानकारी रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के प्रमुख डॉ. समीर वी. कामत ने इंडिया टीवी से खास बातचीत में दी।
S-400 से भी बेहतर
DRDO, S-500 के समकक्ष जो एक एयर डिफेंस सिस्टम तैयार कर रहा है उसका नाम 'प्रोजेक्ट कुशा' (Project Kusha) रखा गया है। ऐसे में यह भारत के लिए एक बड़ा गर्व का क्षण है, क्योंकि यह पूरी तरह से भारत में निर्मित होगा, जिससे विदेशी हथियारों पर देश की निर्भरता काफी कम हो जाएगी। DRDO प्रमुख ने बताया कि यह सिस्टम रूस के S-500 सिस्टम जितना ताकतवर है और कुछ मामलों में S-400 से भी बेहतर है।
क्या है प्रोजेक्ट कुशा?
प्रोजेक्ट कुशा एक लंबी दूरी का एयर डिफेंस सिस्टम है, जिसे भारतीय वायु सेना और नौसेना 2028-29 तक अपने बेड़े में शामिल करना शुरू कर देंगी। यह सिस्टम दुश्मन के स्टील्थ फाइटर जेट्स, बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों, ड्रोनों और बड़े विमानों जैसे AWACS (एयरबॉर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम) को नष्ट करने की क्षमता रखता है।
इस सिस्टम में तीन अलग-अलग इंटरसेप्टर मिसाइलें होंगी शामिल
- 150 KM की रेंज में खतरों से निपटने वाली।
- 250 KM की रेंज में खतरों से निपटने वाली।
- 350-400 KM की रेंज में खतरों से निपटने वाली।
प्रोजेक्ट कुशा की खासियत
रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रोजेक्ट कुशा की लागत S-400 की तुलना में लगभग आधी होने का अनुमान है। यह प्रणाली भारतीय वायु सेना के मौजूदा सिस्टम के साथ आसानी से जुड़ सकती है, जिससे संचालन में दक्षता आएगी। प्रोजेक्ट कुशा में अत्याधुनिक रडार और सेंसर लगे हैं। इसका रडार बहुत मजबूत है, जो 1500 किमी के दायरे में खतरों को पहचान सकता है। यह हाइपरसोनिक मिसाइलों और ऊंचाई पर उड़ने वाले टारगेट्स को निशाना बनाने में सक्षम है। भविष्य में इसकी रेंज को 400 किमी तक और बढ़ाया जा सकता है।