नई दिल्ली: इंडियन एयर फ़ोर्स (IAF) के विंग कमांडर को दिल्ली पुलिस ने डिफेंस से जुड़ी सेंसिटिव जानकारी लीक करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। हनीट्रैप में फंसे इस अधिकारी पर कई गोपनीय जानकारी लीक करने का आरोप है। पुलिस ने ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल वायुसेना का विंग कमांटर ज्यूडिशियल कस्टडी में है। दिल्ली पुलिस के सूत्रों के मुताबिक, यह मामला एक बड़े जासूसी नेटवर्क की ओर इशारा करता है जिसका मकसद स्ट्रेटेजिक मिलिट्री इंटेलिजेंस इकट्ठा करना था।
डिजिटल चैनलों के ज़रिए सेंसिटिव डॉक्यूमेंट भेजने का आरोप
पुलिस सूत्रों ने बताया कि आरोपी अधिकारी एक फील्ड यूनिट में तैनात था। एक महिला ने सोशल मीडिया के ज़रिए आरोपी को हनीट्रैप में फंसाया और वीडियो कॉल पर उससे बातचीत करने लगी। सूत्रों के मुताबिक, महिला ने वायुसेना के इस अधिकारी से मिलिट्री मूवमेंट और ट्रूप डिप्लॉयमेंट के बारे में जानकारी, साथ ही फोटो, वीडियो और दूसरा सेंसिटिव डेटा देने को कहा। पुलिस सूत्रों का कहना है कि विंग कमांडर ने डिजिटल चैनलों के ज़रिए महिला को सेंसिटिव डॉक्यूमेंट और डेटा भेजे।
31 मई की रात को हुई थी विंग कमांडर की गिरफ्तारी
IAF की इंटेलिजेंस विंग द्वारा दिल्ली पुलिस को मामले से जुड़ी खास जानकारी देने के बाद ऑफिसर को 31 मई की रात को गिरफ्तार किया गया। जांच के बाद 30/07/2026 को सक्षम कोर्ट में चार्जशीट जमा कर दी गई है और मामला अभी विचाराधीन है।
भारतीय वायुसेना ने ज़ीरो टॉलरेंस की बात दोहराई
वहीं इंडियन एयर फ़ोर्स ने ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट के तहत ऐसे अपराधों के लिए अपनी ज़ीरो टॉलरेंस की बात दोहराई। IAF अधिकारियों ने कहा, "गिरफ्तार किया गया विंग एक्टिव सर्विलांस में था और उसे सही लॉ एनफोर्समेंट एजेंसियों को सौंप दिया गया था। प्रोएक्टिव उपायों की वजह से, उसे पकड़ लिया गया। IAF ऐसी गतिविधियों के लिए ज़ीरो टॉलरेंस रखता है।"
पाक इंटेलिजेंस ऑपरेटिव्स के हनीट्रैप का हुआ शिकार
सूत्रों के मुताबिक, IAF ऑफिसर कथित तौर पर पाकिस्तानी इंटेलिजेंस ऑपरेटिव्स द्वारा रचे गए हनी ट्रैप का शिकार हुआ। उन पर एक सहकर्मी के मोबाइल फ़ोन पर डेटा चुराने वाला सॉफ़्टवेयर इंस्टॉल करने का भी आरोप है, ताकि डिवाइस पर कंट्रोल पाने की कोशिश की जा सके। सूत्रों ने बताया कि IAF इंटेलिजेंस विंग ने दिल्ली पुलिस के साथ मामले से जुड़े खास इनपुट शेयर किए, जिसके बाद अधिकारी को गिरफ्तार किया गया। आगे की जांच चल रही है। बता दें कि पाकिस्तानी जासूसी एजेंसियों द्वारा भारतीय सेना, वायुसेना, नौसेना के अधिकारियों और जवानों को फंसाने के लिए हनीट्रैप के पैंतरे का काफी इस्तेमाल किया जा रह है। इसलिए काफी अलर्ट रहने की जरूरत है।
इससे पहले अलवर के एक निवासी को पाकिस्तान की इंटेलिजेंस एजेंसी ISI के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। राजस्थान पुलिस ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद राज्य में एक सर्विलांस ऑपरेशन चलाया जा रहा था। अलवर के कैंटोनमेंट इलाके में एक सर्विलांस ऑपरेशन के दौरान, मंगत सिंह की गतिविधियां संदिग्ध पाई गईं। पुलिस ने बताया कि आरोपी को कथित तौर पर ईशा शर्मा नाम की एक महिला पाकिस्तानी हैंडलर ने हनी-ट्रैप में फंसाया था, जिसने सहयोग के बदले उसे पैसे देने की पेशकश की थी। उन्होंने बताया कि वह पिछले दो सालों से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के ज़रिए पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में था। (इनपुट-एएनआई)
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