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भविष्य के युद्ध से लेकर ड्रोन शक्ति तक, कितनी तैयार है भारतीय सेना? आर्मी चीफ ने रिटायरमेंट से ठीक पहले बताया

 Reported By: Manish Prasad Edited By: Subhash Kumar
 Published : Jun 30, 2026 09:58 am IST,  Updated : Jun 30, 2026 02:25 pm IST

सेना प्रमुख के पद से रिटायर होने से पहले जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने India TV से Exclusive बातचीत में भविष्य के युद्ध के तौर-तरीकों से लेकर ड्रोन की बढ़ती जरूरतों आदि के बारे में बात की है। आइए जानते हैं कि उन्होंने क्या कुछ कहा है।

Army chief general upendra dwivedi- India TV Hindi
भारतीय सेना के प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी। (फाइल फोटो) Image Source : PTI

भारतीय सेना के प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी मंगलवार 30 जून को अपने पद से रिटायर हो गए हैं। उन्होंने लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को सेना प्रमुख के पद का कार्यभार सौंप दिया है। पद से रिटायर होने के पहले जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने India TV से Exclusive बातचीत की है। इस बातचीत में उन्होंने भारतीय सेना की तैयारियों, क्षमता, सीमाओं और LoC पर स्थिति और ड्रोन के बढ़ते इस्तेमाल समेत कई अन्य जरूरी मुद्दों पर अपनी बात रखी। आइए जानते हैें कि सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने क्या कुछ कहा है।

प्रश्न 1. वास्तविक नियंत्रण रेखा पर मौजूदा स्थिति को आप कैसे देखते हैं और वहां सेना की प्राथमिकताएं क्या हैं?

उत्तरी सीमाओं पर स्थिति स्थिर है। हाल के समझौतों से जमीन पर स्थिरता बढ़ी है। दोनों पक्ष एक-दूसरे की चिंताओं को लेकर अधिक संवेदनशीलता दिखा रहे हैं। सैन्य स्तर की बातचीत, हॉटलाइन, फ्लैग मीटिंग और कमांडर स्तर की बैठकें अच्छी तरह काम कर रही हैं। नियमित रूप से जमीनी स्तर पर बातचीत भी हो रही है। इससे सीमा प्रबंधन में मदद मिलती है और गलतफहमियां रोकने में सहायता मिलती है। हमारी प्राथमिकताएं स्पष्ट हैं। पहली, वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शांति और स्थिरता बनाए रखना। दूसरी, स्थानीय मुद्दों को बातचीत से सुलझाना। तीसरी, किसी भी स्थिति से निपटने के लिए मजबूत और विश्वसनीय सैन्य तैनाती बनाए रखना।

प्रश्न 2. ऑपरेशन सिंदूर से भारतीय सेना की उभरती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की क्षमता के बारे में क्या संदेश मिलता है?

ऑपरेशन सिंदूर भारत के संकल्प, क्षमता और संयम का स्पष्ट उदाहरण था। यह आतंकवाद के विरुद्ध एक संतुलित और सटीक सैन्य कार्रवाई थी। इसे स्पष्ट उद्देश्य और पूरी तैयारी के साथ अंजाम दिया गया। इस ऑपरेशन ने दिखाया कि आज के समय में सेना की सफलता केवल हथियारों पर निर्भर नहीं होती। सही जानकारी, संयुक्त योजना, सुरक्षित संचार, सटीक कार्रवाई और सूचना प्रबंधन भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। इसमें गति, तालमेल, स्पष्ट सोच और नियंत्रण की भी बड़ी भूमिका होती है। इस ऑपरेशन से भविष्य के लिए भी महत्वपूर्ण सबक मिले हैं। दुनिया में चल रहे संघर्ष बताते हैं कि युद्ध लंबे और कठिन भी हो सकते हैं। साथ ही, छोटे, तेज और तकनीक आधारित संघर्षों की संभावना भी बनी रहती है। दोनों स्थितियों में सफलता के लिए भरोसेमंद जानकारी, मजबूत संचार, बेहतर तालमेल और सटीक कार्रवाई जरूरी होगी।

प्रश्न 3. दुनिया में चल रहे संघर्षों ने बदलाव की जरूरत को सामने रखा है। भारतीय सेना युद्ध के बदलते स्वरूप के लिए खुद को कैसे तैयार कर रही है?

युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। भारतीय सेना भी इसी के अनुसार खुद को तैयार कर रही है। आधुनिकीकरण अब केवल नए हथियार या उपकरण लेने तक सीमित नहीं है। इसमें सेना की संरचना, प्रशिक्षण, तकनीक, सोच, काम करने की व्यवस्था और मानव संसाधन सभी शामिल हैं। भविष्य में तेजी से निर्णय लेना बहुत जरूरी होगा। इसके लिए जानकारी, निगरानी, हथियार, संचार व्यवस्था और कमांडरों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। इसलिए सेना अधिक तेज, अधिक जुड़ी हुई और तकनीक-सक्षम व्यवस्था की ओर बढ़ रही है। रुद्र ब्रिगेड, भैरव बटालियन, अशनि ड्रोन प्लाटून, शक्तिबाण रेजिमेंट और दिव्यास्त्र बैटरियां इसी बदलाव का हिस्सा हैं। इनका उद्देश्य सेना को अधिक तेज, सटीक और सक्षम बनाना है। इसी बदलाव के तहत बाज बटालियन भी एक महत्वपूर्ण पहल है। इन्हें मौजूदा दूर से संचालित विमान इकाइयों के आधार पर विकसित किया जाएगा। इनमें विशेष रूप से प्रशिक्षित सैनिक और अधिकारी होंगे। ये लोग इन प्रणालियों को चलाने और उनका प्रबंधन करने में सक्षम होंगे। इनका उद्देश्य खुफिया जानकारी, निगरानी, युद्धक्षेत्र की लगातार जानकारी और तेज प्रतिक्रिया की क्षमता को मजबूत करना है।

प्रश्न 4. भारतीय सेना की सोच और तैयारी में ड्रोन की भूमिका अब कितनी महत्वपूर्ण हो गई है?

ड्रोन अब आधुनिक सैन्य अभियानों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। अब उनका उपयोग केवल निगरानी के लिए नहीं होता। उनका उपयोग जानकारी जुटाने, लक्ष्य पहचानने, सटीक प्रहार, रसद पहुंचाने, कार्रवाई के बाद नुकसान का आकलन करने और सैनिकों की सुरक्षा जैसे कई कार्यों में किया जा रहा है। अलग-अलग कामों के लिए अलग-अलग प्रकार के ड्रोन की जरूरत होती है। कुछ ड्रोन स्थानीय निगरानी के लिए उपयोगी होते हैं। कुछ लंबी दूरी तक देखने के लिए होते हैं। कुछ रसद सहायता के लिए होते हैं और कुछ विशेष या सटीक कार्यों के लिए। हमारा ध्यान केवल अधिक ड्रोन लेने पर नहीं है। हमारा उद्देश्य ड्रोन से जुड़ी पूरी व्यवस्था तैयार करना है। इसमें स्वदेशी निर्माण, प्रशिक्षित जनशक्ति, रखरखाव, नियमित प्रशिक्षण, ड्रोन के उपयोग की स्पष्ट पद्धति, ड्रोन-रोधी क्षमता और सैन्य योजना में इनका बेहतर उपयोग शामिल है। इसका उद्देश्य सैनिकों और सैन्य गठनों को भविष्य के युद्धक्षेत्र में जरूरी तकनीकी बढ़त देना है।

प्रश्न 5. भारतीय सेना की भविष्य की तैयारी के लिए आत्मनिर्भरता कितनी महत्वपूर्ण है? इस दिशा में सेना के मुख्य प्रयास क्या हैं?

आत्मनिर्भरता अब राष्ट्रीय सुरक्षा और भविष्य की युद्ध तैयारी की मुख्य आवश्यकता बन चुकी है। किसी भी संकट के समय देश को अपनी प्रणालियों, अपने उद्योग और अपनी क्षमता पर भरोसा करने में सक्षम होना चाहिए। स्वदेशी प्रणालियां अब सेना की तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रही हैं। इनका उपयोग निगरानी, संचार, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, सटीक प्रहार, सूचना प्रबंधन और सैन्य निर्णय लेने में बढ़ रहा है। स्वदेशी क्षमता अब केवल सहायक नहीं, बल्कि सेना की मुख्य जरूरत बनती जा रही है। आधुनिक युद्ध तेजी से बदल रहा है। इसलिए सेना को लंबी दूरी तक सटीक प्रहार, बेहतर गोला-बारूद, ड्रोन, ड्रोन-रोधी प्रणालियां, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, मजबूत संचार व्यवस्था और युद्धक्षेत्र की बेहतर जानकारी जैसे क्षेत्रों में लगातार आगे बढ़ना होगा। हमारा प्रयास भारतीय चुनौतियों के लिए भारतीय समाधान तैयार करना है। हमारी सीमाएं, चुनौतियां और सैन्य जरूरतें अलग हैं। इसलिए डीआरडीओ, रक्षा क्षेत्र की सार्वजनिक इकाइयों, निजी उद्योग, एमएसएमई, स्टार्ट-अप और शिक्षा जगत के साथ मिलकर स्वदेशी प्रणालियों को तेजी से परखने, बेहतर सहयोग देने और उन्हें जल्द सेना में शामिल करने पर काम किया जा रहा है।

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