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चीनी के एक्सपोर्ट पर भारत सरकार का बड़ा फैसला, सितंबर तक के लिए किया बैन

 Edited By: Malaika Imam @MalaikaImam1
 Published : May 14, 2026 06:45 am IST,  Updated : May 14, 2026 07:09 am IST

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारत सरकार ने चीनी के एक्सपोर्ट पर बैन लगा दिया है। चीनी निर्यात पर प्रतिबंध सितंबर के अंत तक या अगले आदेश तक लागू रहेगा।

प्रतीकात्मक फोटो- India TV Hindi
प्रतीकात्मक फोटो Image Source : PEXELS.COM

नई दिल्ली: चीनी के निर्यात पर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने  कच्चे, सफेद और रिफाइंड चीनी के एक्सपोर्ट पर तत्काल प्रभाव से 30 सितंबर, 2026 तक के लिए प्रतिबंध लगा दिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला में अस्थिरता पैदा हो गई है।

बुधवार देर रात जारी एक अधिसूचना में विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने कहा कि निर्यात प्रतिबंध सितंबर के अंत तक या अगले आदेश तक लागू रहेगा। यह कदम सरकार की नीति में एक बड़ा बदलाव है, जिसने पहले अधिशेष उत्पादन की उम्मीद में सीमित चीनी निर्यात की अनुमति दी थी।

क्यों लिया गया यह फैसला?

सरकार को डर है कि यदि मानसून उम्मीद से कम रहता है या भू-राजनीतिक तनाव के कारण खाद की आपूर्ति बाधित होती है, तो भारत का शुगर बैलेंस शीट बिगड़ सकता है। 2026-27 के दौरान कम बारिश की आशंका और उर्वरकों की कमी के कारण उत्पादन गिरने का डर है।

2025-26 सीजन के लिए चीनी उत्पादन 275 लाख टन अनुमानित है। पुराने स्टॉक (50 लाख टन) को मिलाकर कुल उपलब्धता 325 लाख टन है। घरेलू खपत 280 लाख टन होने का अनुमान है, जिससे सीजन के अंत में केवल 45 लाख टन स्टॉक बचेगा। यह 2016-17 के बाद का सबसे निचला स्तर है। इसी 'पतले बफर' को देखते हुए सरकार ने एहतियाती कदम उठाया है।

किन क्षेत्रों को मिलेगी छूट?

विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने साफ किया है कि प्रतिबंध कुछ विशेष परिस्थितियों में लागू नहीं होगा।

  1. यूरोपीय संघ (EU) और अमेरिका को 'तरजीही कोटा' के तहत निर्यात जारी रहेगा।
  2. अन्य देशों की खाद्य सुरक्षा जरूरतों के लिए भारत सरकार के विशेष अनुरोध पर निर्यात की अनुमति दी जा सकती है।
  3. यदि लोडिंग 13 मई से पहले शुरू हो गई थी या माल कस्टम्स को सौंपा जा चुका था, तो उसे नहीं रोका जाएगा।

चीनी निर्यात की अनुमति?

भारत सरकार ने पहले 15.9 लाख टन निर्यात की अनुमति दी थी। करीब 8 लाख टन के सौदे हो चुके थे, जिनमें से 6 लाख टन ही शिप हो पाए हैं। अचानक लगे इस प्रतिबंध से मिलों और व्यापारियों के लिए कानूनी व वित्तीय उलझनें बढ़ेंगी।

भारत के इस कदम से न्यूयॉर्क में कच्ची चीनी का वायदा भाव 2% और लंदन में सफेद चीनी 3% तक महंगी हो गई है। भारत, ब्राजील के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक है।

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