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एक साथ दिखेगी भारतीय नौसेना, थलसेना और वायुसेना की ताकत, त्रि-सेवा अभ्यास ‘त्रिशूल’ का होगा आयोजन

 Reported By: Manish Prasad, Edited By: Dhyanendra Chauhan
 Published : Nov 02, 2025 09:45 pm IST,  Updated : Nov 02, 2025 09:49 pm IST

रक्षा मंत्रालय ने कहा कि ‘त्रिशूल’ अभ्यास ‘जय’ (JAI) - ‘संयुक्तता (jointness), आत्मनिर्भरता और नवाचार (Innovation)’ की भावना के माध्यम से सीमाओं की सुरक्षा के लिए भारत के संकल्प का उदाहरण है।

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दिखेगी तीनों सेना की ताकत Image Source : REPORTER INPUT

भारतीय नौसेना, भारतीय सेना और भारतीय वायु सेना के सहयोग से नवंबर 2025 की शुरुआत में त्रि-सेवा अभ्यास (TSE-2025) 'त्रिशूल' आयोजित करने के लिए तैयार है। इस अभ्यास का उद्देश्य संयुक्त परिचालन तत्परता को मजबूत करना और थल, जल और वायु क्षेत्रों में एकीकृत क्षमताओं का प्रदर्शन करना है।

पश्चिमी नौसेना कमान मुख्यालय, तीनों सेनाओं के साथ घनिष्ठ समन्वय स्थापित करते हुए, इस अभ्यास की देखरेख करेगा, जिसमें राजस्थान और गुजरात के खाड़ी और रेगिस्तानी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अभियान शामिल होंगे। समुद्री घटक में उत्तरी अरब सागर में जल-थलचर अभियान शामिल होंगे, जिससे व्यापक बहु-क्षेत्रीय संलग्नता सुनिश्चित होगी।

सेना की प्रमुख टुकड़ियों को सौंपी गई ये कमान

इसमें भाग लेने वाली प्रमुख टुकड़ियां सेना की दक्षिणी कमान, पश्चिमी नौसेना कमान और दक्षिण-पश्चिमी वायु कमान हैं। भारतीय तटरक्षक बल, सीमा सुरक्षा बल और अन्य केंद्रीय एजेंसियां भी बड़ी संख्या में भाग लेंगी, जिससे अंतर-एजेंसी समन्वय और एकीकृत अभियानों पर जोर दिया जाएगा।

जानिए क्या है इस अभ्यास का उद्देश्य?

  • तीनों सेवाओं में परिचालन प्रक्रियाओं को मान्य और समन्वित करना
  • प्लेटफार्मों और बुनियादी ढांचे की अंतर-संचालनीयता को बढ़ाना
  • सेवाओं के बीच नेटवर्क एकीकरण को मजबूत करना
  • कई डोमेन में संयुक्त संचालन को आगे बढ़ाना

TSE-2025 में शामिल होंगे ये दल

  • भारतीय नौसेना के युद्धपोतों और भारतीय वायु सेना के लड़ाकू और सहायक विमानों की बड़े पैमाने पर तैनाती की जाएगी।
  • भारतीय सेना और नौसेना के घटकों के साथ जलस्थलीय अभियान, जिनमें आईएनएस जलाश्व और लैंडिंग क्राफ्ट यूटिलिटी पोत (LCU) शामिल हैं।
  • संयुक्त खुफिया, निगरानी और टोही (ISR), इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (EW) और साइबर युद्ध अभ्यास शामिल हैं।
  • भारतीय नौसेना ने तट-स्थित भारतीय वायुसेना की परिसंपत्तियों के साथ मिलकर विमानवाहक पोतों का संचालन किया जाएगा।

स्वदेशी प्रणालियों और 'आत्मनिर्भर भारत' का प्रदर्शन

यह अभ्यास स्वदेशी प्लेटफार्मों और तकनीकों के उपयोग पर जोर डालेगा, जो आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत आत्मनिर्भरता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उभरते खतरों से निपटने और बदलते युद्ध परिदृश्यों के अनुकूल होने के लिए प्रक्रियाओं और तकनीकों को भी परिष्कृत किया जाएगा।

राष्ट्रीय सुरक्षा तैयारियों को मजबूत करना

टीएसई-2025 'त्रिशूल' भारतीय सशस्त्र बलों के पूर्णतः एकीकृत तरीके से कार्य करने, संयुक्त परिचालन तत्परता को बढ़ाने और राष्ट्रीय सुरक्षा तैयारियों को सुदृढ़ करने के सामूहिक संकल्प को रेखांकित करता है।

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