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लिफ्ट हादसे में RAW अधिकारी की मौत पर परिवार को 3.01 करोड़ का मुआवजा, SC ने NCDRC का फैसला बरकरार रखा

 Written By: Niraj Kumar @nirajkavikumar1
 Published : Jul 29, 2026 11:22 pm IST,  Updated : Jul 30, 2026 12:11 am IST

सुप्रीम कोर्ट ने 2003 में लिफ्ट हादसे में जान गंवाने वाले रॉ अधिकारी विपिन हांडा के परिवार को 3.01 करोड़ रुपये से अधिक मुआवजा देने के NCDRC के फैसले को बरकरार रखा है।

Supreme court- India TV Hindi
Supreme court Image Source : PTI

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2003 में लिफ्ट हादसे में जान गंवाने वाले रॉ अधिकारी विपिन हांडा के परिवार को 3.01 करोड़ रुपये से अधिक मुआवजा देने के राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) के फैसले को बरकरार रखा है। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने लिफ्ट कंपनी ओटिस एलिवेटर कंपनी (इंडिया) लिमिटेड की अपील खारिज कर दी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सुरक्षा एक बुनियादी गारंटी है जो हर लिफ्ट में होनी चाहिए। 

लिफ्ट कंपनी को समस्या की जानकारी थी

शीर्ष अदालत ने एनसीडीआरसी के इस निष्कर्ष में दखल देने से इनकार कर दिया कि सेवा में कमी के लिए मुख्य रूप से ओटिस जिम्मेदार थी। पीठ ने कहा, ''जो पार्टी किसी ऐसी मशीन की पूरी देखरेख का काम लेती है, उसकी उपयोगकर्ता के प्रति अधिक सावधानी बरतने की जिम्मेदारी होती है। ओटिस उस खराबी से अनजान नहीं थी जिसके कारण दुर्घटना हुई। ' अदालत नेकहा, ''उसे समस्या की जानकारी थी और उसने खुद ही इसके समाधान का सुझाव दिया था। ऐसा करने के बाद यह पक्का न कर पाना कि समाधान लागू किया गया है, या फिर समाधान लागू होने तक लिफ्ट को दूसरे तरीकों से सुरक्षित न बनाना, सेवा में कमी माना जाएगा।'' एनसीडीआरसी ने ओटिस, रॉ और मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज (एमईएस) को विपिन हांडा (46) के परिवार को मुआवजा प्रदान करने का निर्देश दिया था। हांडा 'रिसर्च एंड एनालिसिस विंग' (रॉ) के निदेशक थे। 

20 मार्च 2003 को क्या हुआ था 

20  मार्च, 2003 को दिल्ली के लोधी रोड स्थित रॉ कार्यालय में एक मीटिंग खत्म करने के बाद हांडा 12 अन्य अधिकारियों के साथ लिफ्ट में सवार हुए थे। तभी लिफ्ट सातवीं और छठी मंजिल के बीच फंस गई। हांडा से ठीक पहले एक व्यक्ति को बचाया गया, जबकि बाकी लोग लिफ्ट से तब बाहर निकल पाए जब वह छठी मंजिल पर खुली। वर्ष 2005 में उनकी पत्नी रश्मि हांडा और उनके दो बच्चों सृष्टि तथा क्षितिज ने एनसीडीआरसी में शिकायत दर्ज कराई। मामले में एक तकनीकी समिति ने यह नतीजा निकाला कि वोल्टेज में उतार-चढ़ाव की वजह से लिफ्ट रुक गई थी। 

इसके साथ ही समिति ने कहा कि जब हांडा को बाहर निकालने की कोशिश की जा रही थी, तो कोई 11वीं मंजिल पर बने मशीन रूम में घुस गया और 'ब्रेक रिलीज की' (चाबी) से लिफ्ट के ब्रेक खोल दिए। इससे लिफ्ट नीचे की ओर चलने लगी। आयोग ने यह नतीजा निकाला कि 'ब्रेक रिलीज की' से ब्रेक खोलना ही इस हादसे की एकमात्र वजह थी और यह इंसानी गलती या ऐसी वजह से हुआ जिसमें कोई शक की गुंजाइश नहीं है। 

NCDRC ने मुआवजे की जिम्मेदारी ओटिस पर 70 प्रतिशत, मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज (MES) पर 25 प्रतिशत और रॉ पर 5 प्रतिशत तय की थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिम्मेदारी का यह बंटवारा प्रत्येक पक्ष की जानकारी, नियंत्रण और जिम्मेदारी के स्तर को सही तरीके से दर्शाता है। (इनपुट-भाषा)

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