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पूरी दुनिया में मनाया गया अंतरराष्ट्रीय योग दिवस फिर इस भारतीय राज्य ने क्यों किया किनारा? सामने आई वजह

 Edited By: Shakti Singh
 Published : Jun 21, 2026 02:52 pm IST,  Updated : Jun 21, 2026 02:52 pm IST

स्कूल शिक्षा विभाग की तरफ से जारी किए गए आदेश के अनुसार सोमवार को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाएगा। नगालैंड के लोग रविवार को चर्च जाते हैं। इस वजह से इस दिन योग दिवस माने का विरोध हो रहा था।

Yoga- India TV Hindi
योग करते छात्र Image Source : PTI

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 पूरी दुनिया में मनाया गया। कोने-कोने में लोगों ने योग किया और इसे अपनी दिनचर्या में शामिल करने का संकल्प लिया। भारत सरकार के सभी मंत्रियों और अन्य नेताओं ने भी योग किया और इसकी तस्वीरें भी शेयर कीं, लेकिन नगालैंड में रविवार को योग दिवस नहीं मनाया गया। यहां सरकार ने दूसरा आदेश जारी कर सोमवार को योग दिवस मनाने की बात कही है।

नागालैंड ईसाई-बहुल राज्य है। ऐसे में यहां स्टूडेंट बॉडीज, आदिवासी संगठनों, चर्च और राजनीतिक संस्थाओं ने रविवार को योग दिवस मनाने को लेकर के कड़ा विरोध किया। इसके बाद इंटरनेशनल योग दिवस मनाने का ऑफिशियल प्रोग्राम सोमवार तक के लिए टाल दिया गया है।

विरोध के बाद बदला आदेश

स्कूल एजुकेशन डिपार्टमेंट ने एक बदला हुआ ऑर्डर जारी किया, जिसमें स्कूल एजुकेशन डायरेक्टरेट को सभी इंस्टीट्यूशन में इस दिन को 22 जून तक टालने का निर्देश दिया गया। इससे पहले सरकारी और प्राइवेट दोनों स्कूलों को 21 जून को योग दिवस के प्रोग्राम आयोजित करने, स्टूडेंट्स और स्टाफ की भागीदारी सुनिश्चित करने और जीपीएस-टैग वाली तस्वीरों के साथ रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, इसका भारी विरोध हुआ। इसके बाद नया आदेश जारी किया गया है।

नागा स्टूडेंट्स फेडरेशन ने किया था विरोध

नागा स्टूडेंट्स फेडरेशन ने पिछले निर्देश को नागालैंड की ज्यादातर ईसाई आबादी की धार्मिक भावनाओं के प्रति असंवेदनशील बताया था। फेडरेशन ने तर्क दिया कि रविवार पूजा का एक पवित्र दिन है और स्कूलों को योग प्रोग्राम आयोजित करने के लिए मजबूर करना लोगों के संवैधानिक अधिकारों और मान्यताओं का अनादर करना है। सेंट्रल नागालैंड ट्राइब्स काउंसिल ने कहा था कि एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन को ऐसे प्रोग्राम में हिस्सा लेने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए, जिनका धार्मिक या कल्चरल मतलब मेजोरिटी कम्युनिटी की आस्था से मेल नहीं खाता हो।

बैपटिस्ट पास्टर्स यूनियन ने दी थी कार्यक्रम से दूर रहने की सलाह 

नागालैंड कांग्रेस और कई दूसरे ऑर्गनाइजेशन ने भी इसी तरह ओरिजिनल सर्कुलर को वापस लेने की मांग की थी। चर्च बॉडीज ने भी सरकार के पहले के निर्देश का विरोध किया था। नागालैंड बैपटिस्ट पास्टर्स यूनियन ने कहा कि योग की जड़ें धार्मिक और फिलॉसॉफिकल परंपराओं से जुड़ी हैं, जो ईसाई मान्यताओं से मेल नहीं खातीं और चर्चों और एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन से इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने से बचने को कहा था। आधिकारिक तौर पर कार्यक्रम टाले जाने के बावजूद, कुछ सेंट्रल गवर्नमेंट इंस्टीट्यूशन, सिक्योरिटी फोर्स और दूसरे ऑर्गनाइजेशन ने देश भर में मनाए जाने वाले सेलिब्रेशन के हिस्से के तौर पर अलग से योग डे प्रोग्राम किए।

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