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शिक्षक को बीमार होने पर भी नहीं मिली छुट्टी, सलाइन चढ़वाकर जाना पड़ा स्कूल, जानें पूरा मामला

 Edited By: Niraj Kumar
 Published : Mar 08, 2025 08:45 pm IST,  Updated : Mar 08, 2025 10:47 pm IST

भोई ने बताया कि जब वे DPC कार्यालय पहुंचे, तो वहां दोपहर 12 बजे के आसपास उनकी तबीयत और बिगड़ गई। उन्होंने अस्पताल जाने की अनुमति मांगी, लेकिन प्रिंसिपल ने उनकी सेहत की चिंता किए बिना पूछा कि क्या वे दोपहर 2 बजे तक वापस आ सकते हैं।

Odisha, School- India TV Hindi
सलाइन चढ़वाकर स्कूल पहुंचा शिक्षक Image Source : INDIA TV

बलांगीर: ओडिशा के बलांगीर जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। जहां एक शिक्षक को बीमार होने के बावजूद जबरन स्कूल आना पड़ा। शिक्षक ने आरोप लगाया कि उन्हें छुट्टी देने से इनकार कर दिया गया, जिसके कारण उन्हें सलाइन चढ़वाकर स्कूल जाना पड़ा। 

तबीयत खराब होने पर मांगी थी छुट्टी

भैंसा आदर्श विद्यालय में गणित के शिक्षक प्रकाश भोई ने अपने दादा के अंतिम संस्कार में शामिल होने के बाद तबीयत खराब होने के कारण छुट्टी के लिए आवेदन किया था। लेकिन स्कूल की प्रभारी प्रिंसिपल बिजयलक्ष्मी प्रधान ने उनकी छुट्टी को मंजूरी नहीं दी और उन्हें ज़िला शिक्षा अधिकारी और DPC के कार्यालय जाने का निर्देश दिया।  

भोई ने बताया कि जब वे DPC कार्यालय पहुंचे, तो वहां दोपहर 12 बजे के आसपास उनकी तबीयत और बिगड़ गई। उन्होंने अस्पताल जाने की अनुमति मांगी, लेकिन प्रिंसिपल ने उनकी सेहत की चिंता किए बिना पूछा कि क्या वे दोपहर 2 बजे तक वापस आ सकते हैं।  

'मैडम ने मुझे जाने की अनुमति नहीं दी'

भोई ने बताया, "सरकारी अस्पताल दूर था, और मेरे पास निजी अस्पताल जाने के लिए पैसे नहीं थे, न ही मेरा UPI काम कर रहा था। इसलिए बिना इलाज कराए मैं वापस कार्यालय लौट आया और देर शाम तक काम किया। बार-बार अनुरोध करने के बावजूद, मैडम ने मुझे जाने की अनुमति नहीं दी।"

रात में दवा लेने के बाद भी भोई की हालत ठीक नहीं हुई। उन्होंने फिर से प्रिंसिपल से छुट्टी की मांग की, लेकिन उन्होंने मना कर दिया और कहा कि परीक्षा की तैयारी के लिए स्कूल आना जरूरी है। मजबूरी में, उन्होंने डॉक्टर से सलाइन चढ़वाकर स्कूल जाने का फैसला किया, क्योंकि उनकी तबीयत बहुत खराब थी। जब भोई स्कूल पहुंचे, तो उनके सहकर्मियों ने उनकी हालत देखकर तुरंत उन्हें अस्पताल भेज दिया। 

 
भोई ने आरोप लगाया कि यह पहली बार नहीं है जब उनके साथ ऐसा हुआ है। उन्होंने कहा, "अन्य शिक्षकों को आसानी से छुट्टी मिल जाती है, लेकिन मेरे मामले में मुझे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है।" यह मामला शिक्षा विभाग में अधिकारियों की संवेदनहीनता को उजागर करता है। क्या इस मामले में दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी? यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा।

ओडिशा से शुभम कुमार की रिपोर्ट

 

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