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'आज हमारी बेटियां लड़ाकू विमान उड़ा रही हैं', जानें PM मोदी ने क्यों लिया शिवांगी सिंह का नाम

 Edited By: Akash Mishra
 Published : Oct 31, 2025 06:08 pm IST,  Updated : Oct 31, 2025 11:59 pm IST

आज नई दिल्ली में पीएम मोदी अंतर्राष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन 2025 में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कहा कि आर्य समाज की स्थापना के 150 वर्ष, यह अवसर केवल समाज के एक हिस्से या सम्प्रदाय से जुड़ा नहीं है, यह अवसर पूरे भारत की वैदिक पहचान से जुड़ा है।

पीएम नरेंद्र मोदी अंतर्राष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन 2025 में शामिल हुए- India TV Hindi
पीएम नरेंद्र मोदी अंतर्राष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन 2025 में शामिल हुए Image Source : X @AHINDINEWS(SCREENGRAB)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज नई दिल्ली में अंतर्राष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन 2025 में शामिल हुए। यह सम्मेलन महर्षि दयानंद सरस्वती जी की 200वीं जयंती और आर्य समाज की 150 वर्षों की समाज सेवा के उपलक्ष्य में आयोजित ज्ञान ज्योति महोत्सव का हिस्सा है। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "पिछले वर्ष दयानंद सरस्वती जी की जन्मस्थली गुजरात में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया था। उससे पहले, यहीं दिल्ली में, मुझे महर्षि दयानंद सरस्वती जी की 200वीं जयंती समारोह का उद्घाटन करने का सौभाग्य मिला था, उस कार्यक्रम में, हम सभी ने 200वीं जयंती समारोह को दो वर्षों तक एक अखंड बौद्धिक यज्ञ के रूप में जारी रखने का निर्णय लिया था।' पीएम मोदी ने इस मौके पर स्क्वाड्रन लीडर शिवांगी सिंह का भी नाम लिया।

'आज हमारी बेटियां लड़ाकू विमान उड़ा रही हैं'

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "अभी दो दिन पहले ही हमारी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी ने राफेल लड़ाकू विमान में उड़ान भरी। उनकी साथी स्क्वाड्रन लीडर शिवांगी सिंह थीं। आज हमारी बेटियां लड़ाकू विमान उड़ा रही हैं और ड्रोन दीदी बनकर आधुनिक कृषि को भी बढ़ावा दे रही हैं। आज हम गर्व से कह सकते हैं कि दुनिया में सबसे ज्यादा महिला STEM स्नातक भारत में हैं। आज विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी महिलाएं नेतृत्वकारी भूमिका निभा रही हैं।"

'यह अवसर पूरे भारत की वैदिक पहचान से जुड़ा है'

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "आर्य समाज की स्थापना के 150 वर्ष, यह अवसर केवल समाज के एक हिस्से या सम्प्रदाय से जुड़ा नहीं है। यह अवसर पूरे भारत की वैदिक पहचान से जुड़ा है, यह अवसर भारत के उस विचार से जुड़ा है जो गंगा के प्रवाह की तरह खुद को परिष्कृत करने की ताकत रखता है, जिसने आजादी की लड़ाई में कितने ही सैनानियों को वैचारिक ऊर्जा दी, कितने ही क्रांतिकारियों ने आर्य समाज से प्रेरणा लेकर आजादी की लड़ाई में अपना सर्वस्व समर्पित किया था। दुर्भाग्य से राजनीतिक कारणों से आजादी की लड़ाई में आर्य समाज की इस भूमिका को वो सम्मान नहीं मिला जिसका आर्य समाज हकदार था।"

'आर्य समाज प्रबल राष्ट्रभक्तों की संस्था'

पीएम मोदी ने कहा, "आर्य समाज अपनी स्थापना से लेकर आज तक प्रबल राष्ट्रभक्तों की संस्था रही है। आर्य समाज निर्भीक होकर भारतीयता की बात करने वाली संस्था रही है। भारत विरोधी कोई भी सोच हो, विदेशी विचारधाराओं को थोपने वाले लोग हों, विभाजनकारी मानसिकता हो, सांस्कृतिक प्रदूषण के दुष्प्रयास हों, आर्य समाज ने हमेशा इनको चुनौती दी है। मुझे संतोष है कि आज जब आर्य समाज और उसकी स्थापना के 150 वर्ष हो रहे हैं तो समाज और देश दयानन्द सरस्वती जी के महान विचारों को इस विराट स्वरूप में नमन कर रहा है।"

उन्होंने कहा, "स्वामी दयानंद सरस्वती जी जानते थे कि अगर भारत को आगे बढ़ना है तो भारत को सिर्फ गुलामी की जंजीरें ही नहीं तोड़नी हैं, जिन जंजीरों ने हमारे समाज को जकड़ा हुआ था उनको भी तोड़ना जरूरी था। इसलिए स्वामी दयानंद सरस्वती ने ऊंच-नीच, छुआछूत और भेदभाव का खंडन किया।"

'हमारा भारत कई मायनों में विशेष है'

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "हमारा भारत कई मायनों में विशेष है। ये धरती, इसकी सभ्यता, इसकी वैदिक परंपरा, ये युगों-युगों से अमर है क्योंकि किसी भी कालखंड में जब नई चुनौतियां आती हैं, समय नए सवाल पूछता है तो कोई न कोई महान विभूति उनके उत्तर लेकर अवतरित हो जाती है। कोई न कोई ऋषि, महर्षि और मनीषी हमारे समाज को नई दिशा दिखाते हैं। दयानन्द सरस्वती भी इसी विराट परंपरा के महर्षि थे।"

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