राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट के सदस्य डा. अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया है। चंपत राय का इस्तीफा अभी नैतिकता के आधार पर हुआ है। SIT जब जांच करने अयोध्या में राम मंदिर पहुंची तो सबसे पहले पूछताछ चंपत राय से ही हुई। अभी तक की SIT जांच में चंपत राय को सीधे दोषी नही पाया गया है लेकिन किसी को क्लीन चिट भी नही दी गई है। 2019 में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद चंपत राय श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव बनाये गए थे। इस ट्रस्ट में 15 लोग थे। इनमे ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास, महासचिव चंपत राय,अयोध्या के राजा कहे जाने वाले विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र (अब इनकी मौत हो चुकी है), डॉ अनिल मिश्रा, निर्मोही अखाड़े के महंत दीनेन्द्र दास। वहीं, अयोध्या के डीएम पदेन सदस्य है।
चंपत राय ही मंदिर का काम काज देखते थे
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास को बनाया गया था। नृत्य गोपाल दास काफी बीमार रहते हैं, ट्रस्ट के काम काज में उनका ज्यादा दखल नहीं है, वो सिर्फ बड़े समारोह में जाते हैं। निर्मोही अखाड़े के महंत दिनेन्द्र दास भी सिर्फ ट्रस्ट की मीटिंग में जाते हैं, उनका भी कोई रोल नही है। विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र भी जब तक जिंदा रहे वो सिर्फ ट्रस्ट की मीटिंग में जाते थे, बाकी किसी चीज से उनका लेना देना नही था। अयोध्या के डीएम का भी राम मंदिर के रोज के काम मे ज़्यादा दखल नही रहता। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ही मंदिर का सब काम काज देखते थे और डॉ अनिल मिश्रा पूरे वक्त चंपत राय के साथ ही रहते थे।
राम मंदिर निर्माण में चंपत राय की भूमिका
कभी केमेस्ट्री के टीचर रहे चंपत राय 1980 से ही विश्व हिंदू परिषद में रहे राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे। पहले हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट में राम जन्मभूमि का जो मुकदमा चला उसमे भी चंपत राय कई दस्तावेज और सबूत वकीलों की टीम को देते थे। वह अयोध्या के कारसेवक पुरम में रहते हैं। कारसेवक पुरम के जिस कुटी में चंपत राय रहते हैं उसमें कभी विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल रहा करते थे। मंदिर का निर्माण जब से शुरू हुआ चंपत राय की देखरेख में ही हुआ। ट्रस्ट की जो मीटिंग अयोध्या में होती थी उसमे मंदिर निर्माण की एक-एक जानकारी चंपत राय ही देते थे। मंदिर निर्माण को लेकर जितने भी समारोह हुए, 2020 का भूमि पूजन समारोह हो या 2024 का प्राण प्रतिष्ठा समारोह सब चंपत राय की देखरेख में हुए। समारोह में किसको न्योता देना है-किसको नहीं, लिस्ट चंपत राय ही बनाते थे।
कलेक्शन-कॉउंटिंग करीबीयों को सौंपने का आरोप
राम मंदिर जब बन गया और लाखों श्रद्धालु आने लगे, चढ़ावा आने लगा तो चढ़ावे के कलेक्शन से लेकर कॉउंटिंग तक सब कुछ चंपत राय की नजरों में रहता था। आरोप है कि चंपत राय के बहुत नजदीकियों को चढ़ावे के कलेक्शन और कॉउंटिंग में लगाया गया। चढ़ावे की गिनती के लिए बैंक ने एक निजी कंपनी के आउटसोर्स कर्मचारी रखे। आरोप लगे कि चंपत राय और डॉ अनिल मिश्रा की सिफारिश पर लोग बिना जांच पड़ताल के रखे गए। चंपत राय मंदिर में सबसे ताकतवर थे तो उनका कभी ड्राइवर रहा और उनका नजदीकी टिन्नू यादव भी मन्दिर में सेवादार हो गया। टिन्नू यादव क्योंकि चंपत राय का नजदीकी था लिहाजा उसे मन्दिर का अघोषित सर्वेसर्वा कहा जाने लगा।
टिन्नू यादव के पास सभी दान पात्रो की चाभियां रहती थीं, कलेक्शन सेंटर, जहां चढ़ावा काउंट होता, वहां के लॉकर सब की चाभी टिन्नू के पास रहती थीं। यही नहीं जब कलेक्शन सेंटर से कैश बक्सों में भरकर बैंक जमा होने जाता तो उसे बैंक पहुंचाने की ज़िम्मेदारी भी टिन्नू की ही रहती थी। टिन्नू यादव ने अपने भतीजे मनीष यादव को चढ़ावा गिनने के काम मे लगाया।
चंपत राय के बताने पर ही रिकवर हुआ कैश
बड़ा सवाल ये है कि जब चंपत राय मंदिर के सर्वेसर्वा थे, उनकी मर्जी के बिना वहां पत्ता भी नहीं हिलता था तो मंदिर परिसर में चढ़ावे की चोरी कैसे होती रही? मामला उठने के बाद सबसे पहले चंपत राय का बयान भी आया कि ऑडिट चल रहा है लेकिन गड़बड़ियां नहीं मिली हैं। इस बयान के बाद आरोप है कि चंपत राय अपने स्टाफ और अपनी सिक्योरिटी लेकर अयोध्या पुलिस के साथ गिरफ्तार हुए लवकुश मिश्रा के रुदौली के घर पहुंचे। वहां गोबर के ढेर से 10 लाख रुपया बरामद कराया। बाकी लोगों के घर से कैश भी चंपत राय के बताने पर ही रिकवर हुआ। अब कहा जा रहा है आखिर क्यों चंपत राय ने इस मामले में FIR नही कराई? वो आरोपियों को क्यो बचाना चाहते थे?
अनिल मिश्रा के बारे में जानिए
ट्रस्ट के सदस्य डा. अनिल मिश्रा का भी इस्तीफा नैतिकता के आधार पर ही हुआ है। अनिल मिश्रा 2024 के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के मुख्य यजमान थे। चंपत राय के बहुत नज़दीकी, हमेशा चंपत राय के पीछे दिखाई देते थे। पेशे से होम्योपैथी डॉक्टर हैं। राम मंदिर के चढ़ावे का जो कलेक्शन सेंटर है, जहां चढ़ावे की गिनती होती है और जहां से बंडल बन कर बैंक जाते हैं, वहां के इंचार्ज थे डा. अनिल मिश्रा। अनिल मिश्रा आरएसएस से लंबे समय से जुड़े हैं।
कहा जा रहा है कि कलेक्शन सेंटर के इंचार्ज सुभाष चंद्र श्रीवास्तव अनिल मिश्रा के घर किराए पर रहते थे और अनिल मिश्रा के सिफारिश पर ही नौकरी पाये थे। सबसे ज़्यादा चोरी तो कलेक्शन सेंटर से ही हुई। यहां छोटी-मोटी चोरी तो होती ही थी, साथ में यहां सौ-सौ के नोटों की गड्डियां बनती थीं और फिर दस गड्डियों का एक बंडल बनाकर और तब बक्से में रखकर उसे बैंक भेजा जाता था। सूत्रों के मुताबिक, जांच में पता चला है कि यहां सौ-सौ के नोटों के गड्डियों में सौ से ज़्यादा नोट रखे जाते थे और बंडल में दस गड्डियों की जगह ज़्यादा गद्दिया रखी जाती थी जिन्हें बैंक के रास्ते में निकाला जाता था। अब क्लेक्शन सेंटर के इंचार्ज अनिल मिश्रा ही थे तो वो भी शक के दायरे में हैं।
ये भी पढ़ें- राम मंदिर चंदा चोरी केस में चंपत राय की छुट्टी, ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा ने भी दिया इस्तीफा