बेंगलुरु: तीन साल पुरानी अपनी सरकार की छवि में सुधार का प्रयास करते हुए कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने आज अपने मंत्रिमंडल में व्यापक फेरबदल कर 14 मंत्रियों को हटा दिया और 13 नए सदस्यों को इसमें शामिल किया। इस फेरबदल के साथ ही मंत्रियों की संख्या 33 हो गयी है जो संवैधानिक सीमा से एक कम है।
कांग्रेस आलाकमान द्वारा इस बहुप्रतीक्षित फेरबदल को हरी झंडी दिखाने के साथ मुख्यमंत्री ने नौ कैबिनेट मंत्री और चार राज्य मंत्री अपने मंत्रिमंडल में शामिल किए। राज्य में विधानसभा चुनाव में दो साल रह गए हैं और मुख्यमंत्री पर प्रशासन में नयी उर्जा लाने का दबाव था। इस फेरबदल के बाद हटाए गए कुछ मंत्रियों का असंतोष खुल कर सामने आया। वहीं उनके समर्थक हिंसा पर उतारू हो गए। उधर मंत्री बनने की उम्मीद लगाए कई विधायकों ने विधानसभा की सदस्यता छोड़ देने की धमकी दी है।
शपथ ग्रहण के पहले मुख्यमंत्री ने 14 मंत्रियों को पद से हटाने की सिफारिश की जिसे राज्यपाल वाजूभाई वाला ने स्वीकार कर लिया। इन मंत्रियों को उनका प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहने या उनके विवादों में होने के कारण हटाया गया। तनवीर सैत, के थिम्मप्पा, रमेश कुमार, बासवराज राया रेड्डी, एच वाई मेती, एस एस मल्लिकार्जुन, एम आर सीताराम, संतोष लाड और रमेश जरकिहोली को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। राजभवन में आयोजित एक समारोह में राज्यपाल ने नये मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलायी।
प्रियांक खडगे, रूद्रप्पा लमनी, ईश्वर खंद्रे और प्रमोद माधवराज को राज्य मंत्री नियुक्त किया गया है। थिम्मप्पा और रमेश कुमार पूर्व विधानसभाध्यक्ष हैं जबकि खडगे लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खडगे के पुत्र हैं।
जिन मंत्रियों को हटाया गया है उनमें कमरूल इस्लाम, शामनूर शिवशंकरप्पा, वी श्रीनिवास प्रसाद, एमएच अंबरीश, विनय कुमार सोराके, सतीश जारकिहोली, बाबूराव चिंचानसूर, शिवराज संगप्पा तांगदागी, एसआर पाटिल, मनोहर तहसीलदार, के अभयचंद्र जैन, दिनेश गुंडू राव, किमाने रत्नाकर, पीटी परमेश्वर नाइक शामिल हैं। मंत्री पद से हटाए जाने पर अप्रसन्नता जताने वालों में अंबरीश, श्रीनिवास प्रसाद और इस्लाम शामिल थे।
सिने अभिनेता रहे अंबरीश के समर्थकों ने बेंगलुरू-मैसूरू राजमार्ग को मांड्या जिले में जाम कर दिया। इस्लाम के समर्थक कालबुर्गी में तोड़फोड़ पर उतर आए और पथराव किया तथा सड़कों को जाम कर दिया। मल्लिकया गुत्तेदार के समर्थकों ने उन्हें मंत्री नहीं बनाए जाने का विरोध करते हुए कालबुर्गी जिले में एक बस में आग लगा दी। कई विधायकों के मंत्री पद नहीं दिए जाने से नाराज होने के बीच एस टी सोमशेखर ने दावा किया कि आठ विधायक विरोध में विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने पर विचार कर रहे हैं।
हालांकि सिद्धारमैया ने संवाददाताओं से कहा कि पार्टी सदस्यों में कोई असंतोष नहीं है। मुख्यमंत्री को कल पार्टी आलाकमान से फेरबदल के लिए हरी झंडी मिली थी। फेरबदल में मुख्यमंत्री ने जाति और क्षेत्र के समीकरण को संतुलित करने का प्रयास किया है। कर्नाटक में दो साल बाद विधानसभा चुनाव होने हैं और कर्नाटक एकमात्र ऐसा प्रमुख राज्य है जहां कांग्रेस का शासन है।