नई दिल्ली: कावेरी नदी के जव बंटवारे को लेकर बेंगलुरु में हिंसा और आगज़नी की घटनाओं को देकते हुए शहर के 16 थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू लगा दिया गया है। सोमवार को एक बस डिपो में 56 गाड़ियां को उग्र भीड़ ने आग के हवाले कर दिया। हिंसा के बाद से माहौल ख़राब बताया जा रहा है। बेंगलुरु में दुकानदारी करने वाले तमिलों के साथ भी मारपीट और उनकी दुकानों में तोड़फोड़ करने की ख़बरें हैं।
ये हिंसा ऐसे समय हुई है जब पुलिस ने 15 हज़ार पुलिसकर्मियों की तैनाती का दावा किया। इसके अलावा ये भी कहा गया था कर्नाटक प्रदेश रिजर्व पुलिस, सिटी आम्र्ड रिजर्व पुलिस, रैपिड एक्शन फोर्स, क्विक रिएक्शन टीम, विशेष बल, सीआईएसएफ और आईटीबीपी के जवान मोर्चा संभाल रहे हैं।
केरल ने उठाए एहतियाती क़दम
उधर केरल ने बेंगलुरु जाने वाली अपनी तमाम बस सेवाएं बंद कर दी हैं। माहौल को देखते हुए गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से बात की है और हर संभव मदद देने का आश्वासन दिया है। फिलहाल जो हालात हैं उसे देखकर लगता नहीं कि इन पर जल्द काबू पाया जा सकेगा।
तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता ने कर्नाटक में हिंसा को चिंताजनक बताते हुए सिद्धारमैया को पत्र लिखकर तमिल भाषी लोगों तथा उनकी संपत्तियों की हिफ़ाज़त करने को कहा। कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर ने कहा कि सरकार को प्रदर्शन के इस हद तक जाने की उम्मीद नहीं थी।
उन्होंने कहा, ‘‘हमें उम्मीद थी कि अगर फ़ैसला हमारे ख़िलाफ़ जाता है तो थोड़ा प्रदर्शन होगा लेकिन इस हद तक जाने की उम्मीद नहीं थी.’’ उन्होंने कहा कि हिंसा और आगज़नी के सिलसिले में 200 लोगों को हिरासत में लिया गया है। उन्होंने कहा कि बलों को संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात किया जा रहा है, विशेषकर जहां तमिलनाडु के लोग और प्रतिष्ठान हैं।
छर्रे दिल के पास लगने से मौत
इसी हिंसा में सोमवार को कर्नाटक में पुलिस गोलीबारी में एक व्यक्ति की मौत हो गई जबकि एक अन्य घायल हृो गया। पुलिस ने उस समय गोली चलाई जब भीड़ ने राजागोपाल नगर थाना क्षेत्र के हेग्गनहल्ली में एक गश्ती वाहन पर हमले का प्रयास किया। ग़ुस्साई भीड़ ने तमिलनाडु के पंजीकरण वाली बसों और ट्रकों में आग लगा दी।
लक्ष्मी मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल के प्रबंध निदेशक डाक्टर गिरिधर ने पीटीआई भाषा से कहा, ‘छर्रे लगने पर दो लोगों को यहां लाया गया था। एक व्यक्ति के छर्रे दिल के पास लगे थे जिससे उसकी मौत हो गई। अन्य को चोट जांघ पर लगी है जिसका आपरेशन किया जा रहा है।’
पूरा विवाद सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बाद हुआ है जिसमें कावेरी नदी का पानी तमिलनाडु को देने का फैसला सुनाया गया है।
ये है कोर्ट का फैसला
कोर्ट ने दस दिन यानी 15 सितंबर तक कर्नाटक से हर रोज़ 15 हजार क्यूसेक पानी तमिलनाडु को देने को कहा था लेकिन कर्नाटक इतना पानी देने पर राज़ी नहीं हुआ। माहौल को देखते हुए कोर्ट ने कल फैसले में संशोधन किया और 15 हजार क्यूसेक को 12 हजार करने का आदेश दिया लेकिन तारीख 20 सितंबर कर दी। इस हिसाब से पहले डेढ लाख क्यूसेक देना था जो अब एक लाख 80 हजार क्यूसेक से ज्यादा हो गया है।
फिलहाल कर्नाटक का ग़ुस्सा देखकर पानी का ये बंटवारा आसान नज़र नहीं आता। तमिलनाडु सरकार का कहना है कि उसे 1924 के समझौते के तहत पानी दिया जाना चाहिये लेकिन कर्नाटक सरकार का तर्क है कि कम बारिश की वजह से ये संभव नही है। कावेरी नदी तमिलनाडु और कर्नाटक के अलावा केरल और पुदुच्चेरी में भी बहती है।
1976 में पानी को लेकर चारों राज्यों में समझौता हुआ था। विवाद सुलझाने के लिए 1986 में एक ट्रायब्यूनल का गठन भी हुआ था। इसके बाद पीएम ने कावेरी नदी प्राधिकरण का भी गठन किया लेकिन पानी का ये झग़ड़ा ख़त्म नही हुआ।