नयी दिल्ली: सीबीआई के छापे के मुद्दे पर विपक्ष के हमलों के बीच सरकार ने आज राज्यसभा में कहा कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के कार्यालय में छापा नहीं मारा गया बल्कि पूर्ववर्ती दिल्ली सरकार के एक अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले की जांच के तहत यह कार्रवाई की गई है। राज्यसभा में सदन के नेता अरूण जेटली ने शून्यकाल के दौरान तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन द्वारा यह मुद्दा उठाने पर कहा मुख्यमंत्री के कार्यालय में छापा नहीं डाला गया है। इस छापे का अरविंद केजरीवाल या उनके कार्यकाल से कोई लेना देना नहीं है। पूर्ववर्ती दिल्ली सरकार के एक अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला है और छापे की कार्रवाई इसी सिलसिले में की गई है। इस अधिकारी :कार्यालय: की तलाश की जा रही है।
बहरहाल, सरकार के जवाब से असंतुष्ट विपक्षी सदस्यों ने संघीय ढांचे पर हमला और देश में अघोषित आपातकाल लगाने का आरोप लगाया और उनके हंगामे के कारण सदन की बैठक बाधित हुयी। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि अधिकारी के खिलाफ जिस मामले में जांच चल रही है, वह केजरीवाल की सरकार के कार्यकाल से पहले का है। इससे पहले तृणमूल के डेरेक ओ ब्रायन ने आरोप लगाया कि देश में अघोषित आपातकाल लगाया गया है और मुख्यमंत्री के कार्यालय पर छापा मारा गया है। उन्होंने कहा यह कोई पार्टी का मुद्दा नहीं है। यह देश के संघीय ढांचे का मुद्दा है। यह संघीय मुद्दा है।
इस बीच तृणमूल कांग्रेस के सदस्य अपने स्थानों से आगे आ गए। वाम और जदयू सदस्य भी इस मुद्दे के समर्थन में अपने स्थानों पर खड़े हो गए। कांग्रेस के सदस्य अरूणाचल प्रदेश के राज्यपाल की भूमिका पर सवाल उठाते हुए हंगामा करने लगे। यह मुद्दा उन्होंने बैठक शुरू होने पर भी उठाया था। जेटली ने कहा कि तृणमूल नेताओं को छापे के बारे में सही जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार संघवाद का मुद्दा नहीं है। हंगामे के कारण उप सभापति पी जे कुरियन ने सदन की बैठक शून्यकाल में एक बार के स्थगन के बाद दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।