मुंबई: पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि तत्कालीन गृह सचिव जी के पिल्लई ने इशरत जहां मामले से जुड़े कागजात कम से कम तीन बार देखा था और आश्चर्य जताया कि केवल वही कागजात क्यों गुम हो गए जिनसे साफ हो जाता कि पूर्व नौकरशाह झूठ बोल रहे हैं। उन्होंने कहा, फाइल :तत्कालीन: गृह सचिव की मेज से कम से कम तीन बार गुजरी थी। अपनी किताब स्टैंडिंग गार्ड: ए ईयर इन अपोजिशन के विमोचन के मौके पर कांग्रेस नेता ने कहा कि उन्होंने भाषा की गुणवत्ता में सुधार के लिए केवल मामूली संपादन किया था।
चिदंबरम ने स्पष्ट करते हुए कहा, मसौदा जब एजी :अटार्नी जनरल: के पास से आया, जब उन्होंने मेरे पास भेजा और जब मैंने इसे वापस भेजा। कम से कम तीन बार फाइल उनके :पिल्लई: पास गयी। और अब वह कह रहे हैं कि वो कागजात गायब है। जांचे गए मसौदा के गायब होने से किसका फायदा है? मैं चाहता था कि मसौदा एजी जांचें। उन्होंने कहा, :एजी: देश के शीर्ष कानूनी अधिकारी थे। अगर एजी का जांचा गया मसौदा प्रस्तुत हो तो साबित हो जाएगा कि देश के शीर्ष कानूनी अधिकारी एजी ने मसौदा देखा। मैंने कुछ नहीं छिपाया है और मुझे उम्मीद है कि रहस्य से परदा उठ चुका है।
इशरत मामले की गुम संचिकाओं की जांच का आदेश जारी
गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को इशरत जहां मामले में दायर शपथ पत्र से जुड़ी गुम संचिकाओं के मामले की 'आंतरिक जांच' का आदेश दिया। जानकार सूत्रों ने यह जानकारी दी। गृह मंत्रालय के अपर सचिव बी. के. प्रसाद की अध्यक्षता में गठित आंतरिक जांच दल यह पता लगाने की कोशिश करेगा कि इस मामले में दर्ज दूसरे शपथ पत्र के मसौदे से जुड़ी संचिका कैसे गुम हुई। एक सूत्र ने आईएएनएस को बताया कि इस आंतरिक जांच में गृह मंत्रालय में वर्ष 2009 से ये फाइलें कहां-कहां गईं, इस पूरी कड़ी की जांच की जाएगी।
पिछले हफ्ते राजनाथ सिंह ने लोकसभा में गुम हुई संचिकाओं के मामले की आंतरिक जांच कराने की घोषणा की थी। भाजपा और गृह मंत्रालय के अधिकारियों का आरोप है कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की सरकार वर्ष 2004 में हुए इस मुठभेड़ मामले को लेकर बार-बार अपना रुख बदलती रही। इशरत मुंबई कॉलेज की छात्रा थी और कथित रूप से आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के लिए काम करती थी। उस मुठभेड़ में वह आतंकियों के साथ मारी गई थी।