चंडीगढ़: कांग्रेस के विधायकों ने सत्तारूढ़ शिरोमणि अकाली दल-भाजपा गठबंधन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा की मांग करते हुये पंजाब विधानसभा में रात बिताई। विधायकों ने तब तक विधानसभा से जाने से इनकार कर दिया है जब तक कि सरकार यह आश्वास नहीं देती कि इस पर चर्चा की अनुमति दी जाएगी।
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आज सुबह जब पुलिस ने अन्य विधायकों को विधानसभा परिसर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी तब अमरिंदर राजा और सुखजिंदर रंधावा समेत कांग्रेस विधायकों और पुलिस कर्मियों के बीच जमकर बहस हुई। कांग्रेस विधायक भारत भूषण आशू ने कहा कि कल कांग्रेस द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के पराजित होने के बाद से करीब 23 विधायक अभी भी विधानसभा के अंदर हैं।
सरकार ने रोकी बिजली आपूर्ति
कल स्पीकर द्वारा सदन को स्थगित किये जाने के बाद, कांग्रेस के विधायक सदन में रूके रहे और कई विधायकों ने वहां रात बिताई। कल वहां बिजली की आपूर्ति रोक दी गई थी लेकिन बाद में सदन के कर्मचारियों ने बिजली की आपूर्ति शुरू कर दी। रात में कर्मचारियों ने विधायकों को खाने पीने का सामान भी उपलब्ध कराया। आज ईद-उल-जुहा होने के कारण सदन की कार्यवाही नहीं होगी और यह कल फिर से शुरू होगी। आशू ने कहा, हम विधानसभा में तब तक रूके रहेंगे जब तक कि अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा करने की अनुमति देने की हमारी मांग मान नहीं ली जाती।

वरिष्ठ नेता अंबिका सोनी, राजिंदर कौर भट्टल, लाल सिंह और राज कुमार वेरका उन विधायकों में शामिल थे जिन्हें सदन में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी गई और वे विधानसभा के बाहर बैठे हुये थे। भट्टल ने कहा कि सदन में कांग्रेस विधायकों को प्रवेश करने की अनुमति नहीं देना लोकतंत्र की हत्या है।
अमरिंदर सिंह ने पार्टी के विधायकों को दिया समर्थन
विधायकों के प्रवेश को रोकने के लिए विधानसभा की ओर जाने वाली सड़क पर सुरक्षा कर्मियों ने बैरिकेड लगा रखे थे। पंजाब कांग्रेस के प्रमुख अमरिंदर सिंह ने पार्टी के विधायकों को अपना समर्थन दिया और कहा कि राज्य के सामने मौजूद गंभीर और संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा की अनुमति नहीं देना पूरी तरह से अलोकतांत्रिक है।
विधानसभा परिसर के बाहर संवाददाताओं से बातचीत करते हुये सोनी ने कहा कि विपक्ष को अविश्वास प्रस्ताव को लाने का अधिकार है, विशेष रूप से तब जब पंजाब की स्थिति विभिन्न मोर्चों पर बदतर हो गई है। उन्होंने कहा, प्रत्येक दिन किसान आत्महत्या कर रहे हैं और कई अन्य ज्वलंत मुद्दे हैं। अगर कांग्रेस के विधायकों को बोलने की अनुमति नहीं दी जाती है तो यह अलोकतांत्रिक है।