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उमर, कश्मीरी नेताओं ने की मोदी से भेंट, पैलेट गन पर फ़ौरन रोक की मांग

 Written By: India TV News Desk
 Published : Aug 22, 2016 12:17 pm IST,  Updated : Aug 22, 2016 12:17 pm IST

नयी दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की अगुवाई में राज्य के विपक्षी दलों के नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर धाटी की ज़मीनी हक़ीक़त की जानकारी दी। विपक्षी दलों के शिष्टमंडल

A delegation of Opposition Parties from Jammu  Kashmir...- India TV Hindi
A delegation of Opposition Parties from Jammu Kashmir meeting PM Modi

नयी दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की अगुवाई में राज्य के विपक्षी दलों के नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर धाटी की ज़मीनी हक़ीक़त की जानकारी दी। विपक्षी दलों के शिष्टमंडल ने प्रधानमंत्री मोदी को ज्ञापन सौंपकर राज्य में पैलेट बंदूकों पर तुरंत प्रतिबंध लगाने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील की कि वे घाटी में व्याप्त अशांति से निपटने के लिए राजनीतिक रूख अपनाएं।

शिष्टमंडल ने प्रधानमंत्री मोदी से कहा कि कश्मीर में अशांति से निपटने में लगातार विफल रहने से अलगाव की भावना बढ़ेगी। शिष्टमंडल ने प्रधानमंत्री मोदी से अनुरोध किया कि वे कश्मीर घाटी में सभी पक्षों के साथ तुरंत बातचीत शुरू करें।

केंद्र सभी पक्षों से राजनीतिक वार्ता की शुरू करे

ग़ौरतलब है कि घाटी में पिछले 45 दिन से कर्फ्यू लगा हुआ है। मौजूदा हालात में राज्य के सभी विपक्षी दल दलगत राजनीति से उठकर एकजुट हुए हैं और उन्होंने केंद्र से अनुरोध किया है कि वह राज्य में सभी पक्षों के साथ राजनीतिक वार्ता की शुरूआत करे।

उमर के अलावा इस शिष्टमंडल में प्रदेश कांग्रेस का सात सदस्यीय दल और मुख्य विपक्ष नेशनल कांफ्रेंस का आठ सदस्यीय दल शामिल है। यह शिष्टमंडल राष्ट्रीय राजधानी में है और सरकार एवं विपक्ष के नेताओं से मुलाकात कर रहा है। शिष्टमंडल में कांग्रेस दल का नेतृत्व प्रदेश कांग्रेस समिति के प्रमुख जी ए मीर कर रहे हैं। नेशनल कांफ्रेंस के दल में इसके प्रांतीय प्रमुख नसीर वानी और देविंदर राणा भी हैं। इनके अलावा माकपा के विधायक एम वाई तरीगामी भी इस शिष्टमंडल में शामिल हैं।

युवाओं में मोहभंग की भावना पनप रही है

शिष्टमंडल ने घाटी में लोगों की मौतों पर नाराज़गी और दुख प्रकट करते हुए और हालात से निपटने में राजनीतिक इच्छा के अभाव पर निराशा ज़ाहिर करते हुए प्रधानमंत्री को एक ज्ञापन सौंपा। शिष्टमंडल ने प्रधानमंत्री को बताया कि कश्मीर में राजनीतिक समस्या का हल राजनीतिक तरीके से करने के बजाय प्रशासनिक तरीकों से करने के कारण स्थिति और अधिक बिगड़ी है और इसके कारण असंतोष और मोहभंग की अभूतपूर्व अनुभूति पैदा हुई है। यह भावना विशेष तौर पर युवाओं में पनपी है।

ज्ञापन में कहा गया है कि केंद्र सरकार को अब और अधिक समय बर्बाद नहीं करना चाहिए और राज्य में अशांति से निपटने के लिए सभी पक्षों के साथ विश्वसनीय और अर्थपूर्ण राजनीतिक संवाद शुरू करना चाहिए। इसके साथ ही शिष्टमंडल ने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री इस नाजुक स्थिति से निपटने के लिए तत्काल उपाय करेंगे।

राष्ट्रपति से भी मिल चुका है शिष्टमंडल

इससे पहले उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में चार पार्टियां नेशनल कॉन्फ्रेंस, कांग्रेस, पीडीएफ और लेफ्ट के नेता राष्ट्रपति से भी मिल चुकी हैं, जबकि रविवार शाम को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से भी मुलाकात कर चुके हैं। इस मुलाकात में कश्मीर घाटी में जारी अशांति और तनाव की स्थिति को नियंत्रित करने के उपायों पर चर्चा हुई।

गौरतलब है कि आतंकी बुरहान वानी की हत्या के बाद घाटी में जो तनाव शुरू हुआ। उसके बाद से लगातार वहां कर्फ्यू जारी है और कर्फ्यू का रविवार को 45वां दिन रहा। और कश्मीर में अलगाववादियों द्वारा नौ जुलाई से आहूत विरोध के बाद से घाटी में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। इन हिसाओं में अब तक 68 लोगों की मौत हो चुकी है और 5,000 लोग घायल हो गए हैं। घाटी में स्कूलों, कारोबार प्रतिष्ठानों आदि को बंद रखा गया है।

राज्य के शिक्षा मंत्री नईम अख्तर ने रविवार को कहा कि इस अशांति का सर्वाधिक प्रभाव बच्चों पर पड़ा है। अख्तर ने कहा है कि अब समय आ गया है कि माता-पिता को विरोध प्रदर्शन और शिक्षा में से किसी एक को चुनना पड़ेगा। सभी तेल टैंकर ऑपरेटर्स और ट्रक संघ ने उग्र भीड़ पर हमला करने के डर से घाटी में आपूर्ति बंद करने का फैसला किया है।

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