नई दिल्ली: केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को यहां एक किसान द्वारा आत्महत्या करने की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार और विपक्ष को विश्लेषण करना चाहिए कि आजादी के इतने साल बाद भी किसानों की स्थिति में सुधार क्यों नहीं आया। लोकसभा में बयान देते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि क्रमबद्ध लोकप्रिय सरकारें ग्रामीणों और किसानों की स्थिति में सुधार करने में असफल रही है।
दिल्ली में बुधवार को एक किसान द्वारा आत्महत्या करने की वजह से सदन में हंगामे के बीच सिंह ने यह बयान दिया। राजस्थान के दौसा के रहने वाले किसान गजेंद्र सिंह ने भूमि अधिग्रहण विधेयक के विरोध में पेड़ से लटककर आत्महत्या कर ली थी।
उन्होंने कहा, "मैं सहमत हूं कि मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। किसान की मौत शर्मनाक है।"
सिंह ने कहा, "हम सभी को इन मुद्दों पर सोचना चाहिए। ग्रामीणों और किसानों की स्थिति में सुधार क्यों नहीं हुआ।"
उन्होंने आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 1950-51 में भारत की कुल जीडीपी में किसानों का योगदान 55 प्रतिशत रहा, जो घटकर 14 प्रतिशत हो गया। हालांकि, देश की 58 प्रतिशत आबादी अभी भी कृषि में भी संलग्न है।
उन्होंने कहा कि देश की 60 प्रतिशत आबादी को खाद्य सुरक्षा कार्यक्रमों में शामिल किया गया है। इससे गांवों में किसानों की व्यथा का पता चलता है।
गृहमंत्री ने कहा कि आत्महत्या मामले की जांच दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा को सौंप दी गई है और उसे जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है।