नई दिल्ली: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दावा किया कि डीडीसीए विवाद में वित्त मंत्री अरूण जेटली द्वारा उनके तथा आप के पांच अन्य नेताओं के खिलाफ दायर दीवानी मानहानि वाद राजनीतिक दुश्मनी का उत्तम उदाहरण है और इसका उद्देश्य उन्हें परेशान करना और उनकी अभिव्यक्ति की आजादी पर रोक लगाना है। केजरीवाल ने जेटली के वाद पर उच्च न्यायालय द्वारा जारी नोटिस पर अपने लिखित बयान में कहा कि वर्तमान वाद राजनीतिक दुश्मनी का उत्तम उदाहरण है। याचिकाकर्ता ने भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन के खिलाफ बोलने का प्रयास करने के लिए प्रतिवादियों से बदला लिया है।
केजरीवाल ने कहा कि उन्हें तथा अन्य आप नेताओं को उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से रोकने के लिए उन्हें प्रताडि़त करने, दबाव बनाने और परेशान करने की द्वेषपूर्ण मंशा के साथ वाद दायर किया गया है। उच्च न्यायालय ने पिछले साल 22 दिसंबर को जेटली द्वारा दायर दीवानी मानहानि वाद पर केजरीवाल, राघव चड्ढा, कुमार विश्वास, आशुतोष, संजय सिंह और दीपक बाजपेई से जवाब मांगा था। जेटली ने उनके तथा उनके परिवार के खिलाफ कथित रूप से झूठे तथा मानहानिपूर्ण बयान देने के लिए उनसे 10 करोड़ रुपए की क्षतिपूर्ति देने को कहा। चड्ढा ने भी नोटिस पर अपना जवाब दिया और संपर्क किए जाने पर उन्होंने कहा कि उनका तथा मुख्यमंत्री का एक जैसा रूख है।
केजरीवाल बोले मैने जो आरोप लगाए वो सही हैं:
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दावा किया कि उन्होंने दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) विवाद में वित्त मंत्री अरूण जेटली पर जो आरोप लगाए हैं वे सच्चे तथ्यों तथा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध दस्तावेजों पर आधारित हैं। केजरीवाल ने कहा कि जेटली का यह दावा अनर्गल है कि सार्वजनिक जीवन में उनका कद बहुत उंचा है। जेटली द्वारा उनके तथा आप के पांच अन्य नेताओं के खिलाफ दायर दीवानी मानहानि वाद पर दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा जारी नोटिस का जवाब देते हुए केजरीवाल ने अदालत रजिस्ट्रार के सामने दायर बयान में कहा कि उन्होंने खेलों से भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए जनहित में आरोप लगाए हैं। गौरतलब है कि केजरीवाल और अन्य आप नेताओं ने डीडीसीए में कथित अनियमितताओं और वित्तीय धांधलियों को लेकर जेटली पर निशाना साधा था। जेटली वर्ष 2013 तक करीब 13 वर्ष डीडीसीए के प्रमुख रहे।