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संसद बाधित करने पर विपक्ष पर बरसे मोदी

 Written By: IANS
 Published : Dec 15, 2015 09:25 pm IST,  Updated : Dec 15, 2015 09:25 pm IST

कोल्लम: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद की कार्यवाही में बाधा डालने के लिए मंगलवार को विपक्ष को आड़े हाथ लिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष अंग्रेजी के अक्षर 'डी' के तीन शब्दों डिस्रप्ट (बाधा डालना), डिस्ट्रक्ट

Narendra Modi came down on opposition to disrupt Parliament- India TV Hindi
Narendra Modi came down on opposition to disrupt Parliament

कोल्लम: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद की कार्यवाही में बाधा डालने के लिए मंगलवार को विपक्ष को आड़े हाथ लिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष अंग्रेजी के अक्षर 'डी' के तीन शब्दों डिस्रप्ट (बाधा डालना), डिस्ट्रक्ट (ध्वंस करना) और डिमोलिश (नाश करना) के आधार पर काम कर रहा है। मोदी ने यहां यह बात पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता स्वर्गीय शंकर की प्रतिमा के अनावरण के बाद कही। समारोह का आयोजन एझवा हिंदुओं के सामाजिक संगठन श्री नारायण धर्म परिपालाना (एसएनडीपी) योगम ने किया था। स्वर्गीय शंकर ने एसएनडीपी को मजबूत बनाने में योगदान दिया था।

मोदी ने विपक्ष पर वार करते हुए कहा कि चीजें वैसी नहीं हो रही हैं जैसी कि होनी चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा, "लोकसभा चुनाव के नतीजों ने कुछ लोगों को उनके घर पहुंचा दिया। अब वे समस्या पैदा कर रहे हैं।" उन्होंने कहा कि बीते हफ्ते राष्ट्रपति ने कोलकाता में जो कुछ कहा था, उस पर कोई एक शब्द नहीं बोल रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने मजबूत लोकतंत्र के लिए तीन 'डी' को जरूरी बताया था। ये हैं-डिबेट (चर्चा), डिसेंट (असहमति) और डिसीजन (निर्णय)। प्रधानमंत्री ने कहा, "लेकिन इन तीन के बजाए ये लोग (विपक्ष) अपने अलग तरह के तीन 'डी' में लगे हुए हैं। ये हैं-डिस्रप्ट, डिस्ट्रक्ट और डिमोलिश।"

मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति के बताए तीन 'डी' में हमने एक और 'डी', डेवलपमेंट (विकास) को जोड़ा है। मोदी ने कहा, "अभी-अभी अनावृत हुई शंकर की प्रतिमा के सामने मैं आप सभी से वादा कर रहा हूं कि केरल की विकास की जरूरतों का केंद्र ध्यान रखेगा। हम केरल के विकास में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।" मोदी ने स्वर्गीय शंकर को दूरदृष्टा बताते हुए उनके योगदान की सराहना की। मोदी ने कहा कि शंकर और मन्नाथु पद्मनाभन ने यहां हिंदू महा मंडलम के लिए काम किया था। जनसंघ के नेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी को इसके उद्घाटन के लिए बुलाया था। तबियत खराब होने की वजह से मुखर्जी आ नहीं सके थे। बाद में केरल आने पर उन्होंने शंकर को मिलने के लिए बुलाया था।

प्रतिमा अनावरण समारोह में मुख्यमंत्री ओमन चांडी को न बुलाए जाने पर विवाद भी पैदा हुआ। संसद में कांग्रेस ने इस पर हंगामा किया था। एसएनडीपी के महासचिव वेल्लापल्ली नटेसन ने अपने भाषण में इस विवाद का जिक्र नहीं किया। उन्होंने सबरीमाला मंदिर को राष्ट्रीय तीर्थ केंद्र घोषित करने, केरल केंद्रीय विश्वविद्यालय का नाम श्रीनारायण गुरु के नाम पर रखने, अपनी वित्तीय योजना को केंद्रीय मदद देने और सबरी रेलवे लाइन बनाने की मांग की।

मोदी ने इन मांगों का जिक्र किया और कहा कि संसद का सत्र चलने की वजह से वह इस बारे में कोई घोषणा नहीं कर सकते। समारोह में चांडी को नहीं बुलाने के खिलाफ कांग्रेस ने तिरुवनंतपुरम में आवाज उठाई। पार्टी कार्यकर्ताओं ने विधानसभा के सामने शंकर की प्रतिमा पर प्रार्थना सभा का आयोजन किया। इसमें चांडी समेत राज्य कांग्रेस के कई बड़े नेता भी पहुंचे।

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