नई दिल्ली: ग्रामीण इलाकों से शहरों में बड़े पैमाने पर आबादी के पलायन को देखते हुए सरकार ने आज कहा कि वह जल्द ही आवास के एक व्यावहारिक विकल्प के तौर पर किराये के मकान की उपलब्धता बढ़ाने के लिए एक नीति लाएगी।
केंद्रीय आवास एवं शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्री एम वेंकैया नायडू ने यहां रेंटल हाउसिंग पॉलिसी और नेशनल हाउसिंग एंड हैबिटेट पॉलिसी पर आयाजित एक क्षेत्रीय कार्यशाला में कहा कि 1.9 करोड़ घरों की कमी होने के बावजूद 2011 जनगणना आंकड़े के अनुसार शहरी इलाकों में करीब 1.109 करोड़ घर खाली पड़े हैं।
उन्होंने कहा कि हालांकि घरों के खाली होने के सही कारण का पता लगाना मुश्किल है, ऐसा महसूस किया गया कि कम किराया, घर पर दोबारा स्वामित्व संबंधी चिंताएं और प्रोत्साहन की कमी आदि इसके कारण हैं। इस समय देश में करीब 1.9 करोड़ घरों की कमी है।
नायडू ने कहा, अगर इन खाली घरों को किराए पर उपलब्ध कराया जाए तो शहरों में घरों की कमी की समस्या को पूरी तरह तो नहीं लेकिन एक हद तक हल किया सकता है। हम औपचारिक तौर पर किराये वाले आवास को लेकर एक कार्यक्रम शुरू करने की कोशिश कर रहे हैं जिसमें 1.109 करोड़ खाली घरों को इस्तेमाल में लाया जा सकता है।