नई दिल्ली: राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरह देश में लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने का समर्थन किया है। उनका मानना है कि बार-बार होते रहने वाले चुनावों की वजह से देश में विकास का काम प्रभावित होता है। इसके साथ ही समय, संसाधन और धन तीनों की बर्बादी होती है।
शिक्षक दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में एक छात्र के सवाल के जवाब में राष्ट्रपति ने कहा कि सभी पार्टियों को इस मुद्दे पर साथ आना चाहिए। राष्ट्रपति ने कहा, लगातार चुनाव होते रहने से विकास कार्य रुक जाते हैं। देश के किसी एक राज्य में चुनाव होने से सरकार का सामान्य कामकाज रुक जाता है। ऐसा आचार संहिता लागू होने के कारण होता है, इसे सत्ताधारी और विपक्षी दोनों पार्टियों को मानना होता है। इस समस्या का समाधान करने के लिए राजनीतिक दलों को विचार करना होगा।
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक साथ सारे चुनाव कराने की बात कही थी। उन्होंने टीवी इंटरव्यू के दौरान कहा था कि लोकसभा, विधानसभा चुनाव साथ होने चाहिए। इस पर सभी राजनीतिक दलों को साथ आना चाहिए। इस पर व्यापक बहस होनी चाहिए। पीएम मोदी ने मार्च में भाजपा नेताओं की बैठक के दौरान यह विचार सबसे पहले सामने रखा था।
उन्होंने कहा था कि बार-बार चुनाव होने से आचार संहिता लग जाती है। जिसके चलते विकास के काम रुक जाते हैं। इसलिए पंचायत, विधानसभा और संसद के चुनाव एक साथ होने चाहिए जिससे कि समय और पैसा बचाया जा सके।