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पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की जयंती पर राहुल-सोनिया ने शक्तिस्थल जाकर दी श्रद्धांजलि

राहुल गांधी और सोनिया गांधी ने सोमावर को भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि दी।

IndiaTV Hindi Desk IndiaTV Hindi Desk
Updated on: November 19, 2018 10:26 IST
Rahul Gandhi and Sonia Gandhi pays tribute to Indira Gandhi on death anniversary, visits Shakti Stha- India TV Hindi
Rahul Gandhi and Sonia Gandhi pays tribute to Indira Gandhi on death anniversary, visits Shakti Sthal

नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सोमावर को भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि दी। इंदिरा की बहू सोनिया और पोते राहुल ने शक्तिस्थल जाकर आयरन लेडी को याद किया। भारत रत्न से सम्मानित इंदिरा गांधी की सोमवार को 101वीं जयंती है। उनका जन्म 19 नवंबर 1917 को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज (तत्कालीन इलाहाबाद) में हुआ था। इंदिरा को आजाद भारत की सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक माना जाता है।

इनके अलावा पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, पूर्व उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद, वरिष्ठ नेता पी सी चाको, दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय माकन और पार्टी के अन्य नेताओं व कार्यकर्ताओं ने भी श्रद्धांजलि दी।

इंदिरा गांधी ने अपने प्रधानमंत्रित्व काल में कई ऐसे फैसले लिए जिसने भारत की रूपरेखा ही बदल दी। बैंकों का राष्ट्रीयकरण, प्रिवी पर्स को खत्म करना कुछ ऐसे ही फैसले थे। इंदिरा ने न सिर्फ भारती राजनीति की रूपरेखा बदली बल्कि उपमहाद्वीप का भूगोल भी बदल दिया। जब भारतीय सेना ने 1971 में पाकिस्तान को हराया और बांग्लादेश नाम का नया देश बना तब इंदिरा ही देश की प्रधानमंत्री थीं। पाकिस्तान के टूटने के बाद से दक्षिण एशिया की पूरी राजनीति ही बदल गई। वह दो अलग-अलग अवधि में 15 वर्षों से अधिक समय तक देश की प्रधानमंत्री रहीं।

दादी इंदिरा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करते कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, सामने से गुजरते हुए पूर्व

दादी इंदिरा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करते कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, सामने से गुजरते हुए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह।

हालांकि 1975 में लगाए गए आपातकाल को उनके राजनैतिक जीवन के काले अध्याय के रूप में देखा जाता है। आपातकाल में भारतीय लोकतंत्र का बुरी तरह गला घोंटा गया और इसने इंदिरा की छवि एक तानाशाही रवैया रखने वाली नेता की बना दी। यही वजह है कि आपातकाल के ठीक बाद हुए चुनावों में इंदिरा की करारी हार हुई, लेकिन 3 साल बाद ही उन्होंने सत्ता में जोरदार वापसी की। 31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा की उनके ही सुरक्षाकर्मियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।

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