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Rajat Sharma's Blog | झारखंड: हेमंत सोरेन CBI जांच क्यों नहीं चाहते ?

 Written By: Rajat Sharma
 Published : Aug 11, 2026 03:27 pm IST,  Updated : Aug 11, 2026 03:28 pm IST

झारखंड सरकार कह रही है कि उसने सभी जायज मांगें मान ली हैं, JPSC की तीन परीक्षाएं रद्द कर दी, TDPL ने जितनी परीक्षाएं कराई, उन सबकी सीआईडी से जांच कराई जा रही है, लेकिन छात्रों की मांग है कि लीपापोती की बजाय सारे मामलों की जांच सीबीआई से कराई जाय।

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इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा। Image Source : INDIA TV

सरकारी भर्तियों की परीक्षाओं में घोटालों के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों ने झारखंड सरकार को लोकतन्त्र की ताकत दिखाई। प्रदर्शनकारी सारी बाधाओं को पार करके झारखंड विधानसभा के परिसर में पहुंच गए। देर शाम छात्रों पर फिर लाठीचार्ज हुआ। दिन में पुलिस ने छात्रों पर लाठीचार्ज किया था और आंसू-गैस के गोले छोड़े थे।

छात्रों के रुख से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार दबाव में है। जिस वक्त छात्र सड़कों पर थे, उसी वक्त JPSC के बरखास्त अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते को गिरफ्तार किया गया, कमिशन के तीन सदस्यों से इस्तीफे ले लिये गये। झारखंड सरकार कह रही है कि उसने सभी जायज मांगें मान ली हैं, JPSC की तीन परीक्षाएं रद्द कर दी, TDPL ने जितनी परीक्षाएं कराई, उन सबकी सीआईडी से जांच कराई जा रही है, लेकिन छात्रों की मांग है कि लीपापोती की बजाय सारे मामलों की जांच सीबीआई से कराई जाय।

सवाल ये है कि हेमंत सोरेन की सरकार घोटालों की जांच CBI को देने से क्यों डर रही है? एल. ख्यांग्ते का हेमंत सोरेन के साथ क्या कनेक्शन है? 

मेरा मानना है कि  झारखंड में प्रोटेस्ट करने वाले छात्रों की मांगे जायज़ हैं। प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, छात्रों ने न किसी को गाली दी, न रील्स बनाई, न किसी पुलिसवाले पर हमला किया। फिर भी पुलिस ने दस घंटे में चार बार लाठियां चलाईं। दसियों बार आंसूगैस के गोले छोड़े, विधानसभा शहर से दूर है, वहां पहुंचना मुश्किल काम है तो भी हजारों छात्र वहां पहुंच गए। इससे लगता है कि आंदोलन को  छात्रों का व्यापक समर्थन मिला है। 18 दिन से छात्र धरने पर बैठे हैं, न किसी ने Zomato से खाना पहुंचाया, न किसी ने आसपास रात बिताने का इंतजाम किया।

राहुल गांधी ने बस ये कह कर काम चला लिया कि वो लाठीचार्ज के खिलाफ हैं। राहुल भूल गए कि हेमंत सोरेन की सरकार में कांग्रेस पार्टनर है। मुख्यमंत्री से कह कर छात्रों की मांगें मनवाई जा सकती हैं। छात्रों ने किसी का इस्तीफा नहीं मांगा। वो CBI जांच की मांग कर रहे हैं। जब आरोप सरकार पर हों तो CID की जांच पर कैसे भरोसा किया जा सकता है? CBI की जांच में किसी को क्या समस्या हो सकती है ?

संसद : राहुल को अमित शाह का जवाब सुनने का धैर्य होना चाहिए

विरोधी दलों के हंगामे के कारण मंगलवार को भी लोकसभा का कामकाज ठप रहा। हंगामे के बीच केरल राज्य का नाम केरलम करने का बिल पास हो गया। आज संसद भवन के बाहर एक तरफ एनडीए, तो दूसरी तरफ कांग्रेस और अन्य विरेधी दलों के सदस्यों ने प्रदर्शन किए।

कांग्रेस की मांग है कि गृह मंत्री अमित शाह जंतर-मंतर पर हुए पुलिस एक्शन के बारे में बयान दें, लेकिन सरकार का कहना है कि पहले इस विषय पर बहस हो, फिर अमित शाह उत्तर देंगे। विपक्ष अमित शाह के बयान पर अड़ा है। अब मॉनसून सत्र समाप्त होने में सिर्फ दो दिन बचे हैं।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि अब ऐसा नहीं चलेगा कि अपनी बात रख लो और अमित शाह के जवाब के दौरान हंगामा या वॉकआउट कर दो।

संसद चलनी चाहिए, विपक्ष सवाल पूछे, अमित शाह जवाब दें, इसमें किसी को क्या परेशानी हो सकती है? लेकिन राहुल गांधी की बातें सुनकर लगता है, उन्हें अंदाजा नहीं था कि अमित शाह लोकसभा में आकर छात्रों के आंदोलन और पुलिस एक्शन से जुड़े सवालों के जवाब देने के लिए तैयार हो जाएंगे।

अब जब अमित शाह तैयार हो गए तो राहुल गांधी को लगता है कि अगर अमित शाह ने सारी बातों का convincing जवाब दे दिया, तो फ़ज़ीहत होगी। इसीलिए अब नई शर्तें लगा दी गई हैं। राहुल सवाल पूछना चाहते हैं, पर जवाब क्या हो, ये भी dictate करना चाहते हैं। पर जो सवाल पूछते हैं, उनमें जवाब सुनने का धैर्य और साहस, दोनों होना चाहिए।

देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 10 अगस्त, 2026 का पूरा एपिसोड

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