नयी दिल्ली/मुंबई/चंडीगढ़: विमुद्रीकरण को लेकर विपक्ष की आलोचना झेल रही मोदी सरकार के दो अहम सहयोगियों शिवसेना और अकाली दल ने राजग की एक बैठक के दौरान इस कदम का समर्थन तो किया लेकिन साथ ही इसके कार्यान्वयन को लेकर अपनी शंका जाहिर की। भाजपा के बाद राजग के सबसे बड़े घटक दल शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में प्रधानमंत्री की जमकर आलोचना की है। वहीं पंजाब के उपमुख्यमंत्री सुखवीर सिंह बादल ने इस मुद्दे पर पेश आ रही मुश्किलों की तरफ संयमित तरीके से इशारा किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कालाधन को व्यवस्था से बाहर करने की दिशा में लोगों से सहयोग की भावनात्मक अपील की थी। इससे अलग शिवसेना ने विमुद्रीकरण की प्रक्रिया को भयंकर और अव्यवस्थित बताया, जिससे देश में आर्थिक अराजकता पैदा हो गयी है। सामना में प्रकाशित एक संपादकीय में कहा गया है, सवा करोड़ भारतीय बिना खाना और पानी के धूप में तड़पने को मजबूर हैं। क्या आप उनसे यह उम्मीद करते हैं कि वे भविष्य में आपको वापस लाएंगे? क्या आप लोगों के आशीर्वाद की अदागयी उनकोे सड़कों पर आने को मजबूर करके कर रहे हैं? यह सीधे-सीधे विश्वासघात है।
अकाली दल नेता सुखवीर बादल ने विमुद्रीकरण अभियान का समर्थन किया लेकिन साथ ही इस अभियान के जरिये 50 दिन के भीतर कालाधन को खत्म किये जाने को लेकर शंका जाहिर की और इसकी राह में आ रही परेशानियों को भी जिक्र किया।