नई दिल्ली: नवजोत सिंह सिद्धू ने हॉकी के पूर्व खिलाड़ी परगट सिंह और अन्य नेताओं के साथ मिलकर एक नया राजनीतिक मोर्चा बनाने की घोषणा कर दी। सिद्धू ने इस नए मोर्चे को आवाज़-ए-पंजाब नाम दिया है। इससे पहले उनके अरविन्द केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी में शामिल होने की चर्चा चल रही थी। सिद्धू के इस नए मोर्चे को आम आदमी पार्टी के लिए करारा झटका माना जा रहा है।
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आप के लिए सिद्धू का यह मोर्चा इसलिए अच्छी खबर नहीं है क्योंकि आम आदमी पार्टी सिद्धू के साथ-साथ परगट सिंह को भी अपने साथ लाने की इच्छुक थी। पार्टी ने पिछले महीने राज्यसभा की सदस्यता से त्यागपत्र देने वाले बीजेपी के पूर्व नेता सिद्धू को लुभाने की बहुत कोशिश की, लेकिन दोनों पक्ष किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके। सिद्धू के इस नए मोर्चे के गठन की खबर ऐसे वक्त में आई है जब आप राज्य संयोजक सुच्चा सिंह छोटेपुर को पार्टी से निकाले जाने के कारण विभाजन के खतरे से जूझ रही है। छोटेपुर को रिश्वत लेने के आरोप में पार्टी से निकाला गया है।
इस बारे में जब आप के पंजाब प्रभारी संजय सिंह की राय ली गई तो उन्होंने कहा, ‘हमें सूचना मिली है कि सिद्धू ने राजनीतिक मोर्चे का गठन किया है। इसपर वही टिप्पणी कर सकते हैं कि वह पार्टी का गठन करेंगे या नहीं।’ पंजाब में आप के नेता हिम्मत सिंह शेरगिल ने कहा कि राजनीतिक संगठन बनाने का फैसला सिद्धू का व्यक्तिगत निर्णय है। यह पूछने पर कि क्या इससे अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव में आप को नुकसान होगा, शेरगिल ने कहा कि आम आदमी पार्टी विचारधारा आधारित पार्टी है, व्यक्ति आधारित नहीं और लोग हमारे साथ हैं।
जैसा कि हमने आपको पहले ही बताया कि आकाली-दल के कुछ बागी नेताओं के साथ मिलकर नवजोत सिंह सिद्धू अपना राजनीतिक मोर्चा आवाज़-ए-पंजाब के निर्माण के लिए पूरी तरह तैयार हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने पिछले महीने सिद्धू को आप में शामिल होने की अफवाहों का खंडन करने का प्रयास करते हुए कहा था कि उन्होंने कोई पूर्व शर्त नहीं रखी है और उन्हें सोचने के लिए बस कुछ वक्त चाहिए।