देहरादून: सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर आगामी 10 मई को उत्तराखंड विधानसभा में होने वाले शक्ति परीक्षण को लेकर कांग्रेस और भाजपा दोनों राजनीतिक दलों ने आज अपने विधायकों को व्हिप जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी। राज्य विधानसभा में कांग्रेस की मुख्य सचेतक और पूर्व संसदीय कार्यमंत्री इंदिरा ह्रदयेश ने यहां बताया कि पार्टी के सभी विधायकों को 10 मई को होने वाले शक्ति परीक्षण को लेकर व्हिप जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है।
उन्होंने बताया कि ई-मेल, एसएमएस और चिट्ठी सहित सभी माध्यमों से भेजे जा रहे व्हिप में सभी विधायकों को हर परिस्थिति में 10 मई को विधानसभा में मौजूद रहने और हरीश रावत सरकार द्वारा पेश किये जाने वाले विश्वास मत के समर्थन में मतदान करने के स्पष्ट निर्देश दिये गये हैं।
शक्ति परीक्षण में कांग्रेस के पक्ष में बहुमत सिद्ध हो जाने के प्रति आश्वस्त दिखायी दे रही इंदिरा ने कहा कि संख्या बल उनकी पार्टी के पक्ष में है और जीत भी उसी की होगी। उन्होंने बताया कि शक्ति परीक्षण से पहले कांग्रेस विधानमंडल दल की एक बैठक भी बुलायी जायेगी। हालांकि, इसका समय पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के साथ सलाह मशविरा करने के बाद तय किया जायेगा।
उधर, राज्य विधानसभा में भाजपा के मुख्य सचेतक मदन कौशिक ने बताया कि पार्टी विधायको को व्हिप जारी करने की तैयारियां कर ली गयी हैं और कल देहरादून में होने वाली पार्टी विधानमंडल दल की बैठक में हर विधायक को व्हिप की प्रति दे दी जायेगी। उन्होंने कहा कि अगर किसी कारणवश विधायक बैठक में उपस्थित नहीं हो पाये तो उन्हें संबंधित जिले के जिलाधिकारी के माध्यम से व्हिप दिया जायेगा।
घनसाली से पार्टी विधायक भीमलाल आर्य के बारे में पूछे जाने पर कौशिक ने कहा कि आर्य को भी पार्टी व्हिप जारी किया जायेगा और उन्हें शक्ति परीक्षण के दौरान अन्य विधायकों की तरह पार्टी लाइन पर मतदान करने के निर्देश होंगे। पूर्व मुख्यमंत्री रावत से नजदीकियों और अपनी पार्टी के प्रति संदिग्ध निष्ठा के चलते पिले महीने भाजपा ने विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल से दल-बदल कानून के तहत उनकी विधानसभा सदस्यता रदद करने की मांग की थी। हालांकि, आर्य के खिलाफ पर्याप्त सबूत न होने का आधार बताते हुए कुंजवाल ने वह याचिका खारिज कर दी थी।
कौशिक ने कहा कि यदि आर्य व्हिप को लेने से इंकार करते हैं तो उन्हें विधानसभा अध्यक्ष के जरिये व्हिप की प्राप्ति सुनिश्चित करायी जायेगी। सर्वोच्च न्यायालय ने 10 मई को अपनी निगरानी मे उत्तराखंड विधानसभा में शक्ति परीक्षण कराये जाने के आदेश दिये हैं।
कांग्रेस के नौ अयोग्य घोषित हो चुके विधायकों को राज्य विधानसभा में 10 मई को होने वाले शक्ति परीक्षण के दौरान मतदान से वंचित रखे जाने के न्यायालय के आदेश से सदन में कांग्रेस लाभ की स्थिति में नजर आ रही है। नौ विधायकों के अयोग्य घोषित होने से 71 विधायकों की क्षमता वाली विधानसभा की प्रभावी सदस्य संख्या 62 रह गयी है जिसमें बहुमत साबित करने के लिये 31 विधायकों का समर्थन जरूरी होगा।