नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में करारी हार के बाद कांग्रेस के अंदर लीडरशिप में बदलाव की मांग उठने लगी है। हालांकि कोई भी सीधे तौर पर पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर ऊंगली उठाने से बच रहा है।
देश-विदेश की खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें
राहुल गांधी खुद यूपी में कांग्रेस के प्रचार की कमान संभाले हुए थे जहां विधानसभा की 403 सीटों पर कांग्रेस पार्टी महज 7 सीटों तक सिमटकर रह गई। हालांकि राहुल गांधी कह चुके हैं कि पार्टी में संगठन के स्तर पर बदलाव की जरूरत है। लेकिन पुराने अनुभवों के चलते लोग राहुल की इन बातों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। पूर्व में भी इस तरह के वादे किए गए लेकिन उससे पार्टी में किसी तरह का ठोस बदलाव नहीं आ पाया।
- राजनीतिक परिदृश्य में बने रहने के लिए कांग्रेस पार्टी को रणनीति और संगठन के स्तर पर बदलाव लाने की जरूरत है। हमें अब समेकित तौर पर एक गठबंधन बनाने की जरूरत है।-मणिशंकर अय्यर
- कांग्रेस पूरी तरह से उन दर्जन भर लोगों पर निर्भर हो गई है जिनके पास कोई जिम्मेदारी नहीं है। पार्टी की कीमत पर ये लोग व्यक्तिगत पसंद और नापसंद के आधार पर फैसले लेने लगे। ये लोग पार्टी में अहम पदों पर बने हुए हैं।- कृष्ण चंद्र देव
- पार्टी को आत्मनिरीक्षण की जरूरत है। सबसे बड़ा सवाल है कि राष्ट्र स्तर पर कांग्रेस पार्टी लीडरशिप खड़ी नहीं कर सकी?- अश्विनी कुमार