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मुद्दों पर कांग्रेस के साथ सहयोग कर सकते हैं, लेकिन गठबंधन नहीं: येचुरी

 Written By: Bhasha
 Published : Jun 28, 2015 12:37 pm IST,  Updated : Jun 28, 2015 12:39 pm IST

कोलकाता: माकपा कांग्रेस के साथ मुद्दों के आधार पर सहयोग करने के लिए तैयार है लेकिन संसद के बाहर उसके साथ किसी भी तरह का गठबंधन करने से इंकार करते हुए पार्टी ने कहा कि

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मुद्दों पर कांग्रेस के साथ सहयोग कर सकते हैं: येचुरी

कोलकाता: माकपा कांग्रेस के साथ मुद्दों के आधार पर सहयोग करने के लिए तैयार है लेकिन संसद के बाहर उसके साथ किसी भी तरह का गठबंधन करने से इंकार करते हुए पार्टी ने कहा कि अब तक नव उदारवादी नीतियों का अनुसरण करने वाले दल के सथ वह कुछ भी नहीं करेगी।

माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा, हम विशेष मुद्दों पर संसद में और बाहर मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ, दूसरी राजनीतिक ताकतों के साथ एकजुट हो सकते हैं। संसद के बाहर हम भूमि अधिग्रहण विधेयक के मुद्दे पर कांग्रेस के साथ राष्ट्रपति के पास गए। विशेष मुद्दों पर हम अन्य राजनीतिक दलों के साथ सहयोग करने के लिए तैयार हैं। येचुरी ने कहा लेकिन जब हम कहते हैं, संसद के बाहर नहीं.. तो इसका मतलब है कि किसी भी दल (कांग्रेस) के साथ गठबंधन या मोर्चे पर विचार नहीं किया जा रहा है। उनसे पूछा गया कि जब माकपा विशेष मुद्दों पर कांग्रेस के साथ लड़ने की इच्छुक है तो भाजपा से लड़ने के लिए गठबंधन करने से उसे कौन सी बात रोक रही है।

इस पर येचुरी ने कहा, हम गैर कांग्रेस धर्मनिरपेक्ष दलों के साथ एकजुट होने का आह्वान कर रहे हैं। कांग्रेस क्यों नहीं ? इसलिए कि कांग्रेस ही आज इन सांप्रदायिक ताकतों को सत्ता में ले कर आई है। उन्होंने कहा, उनके (कांग्रेस के) भ्रष्टाचार, उनकी आर्थिक नीतियों के कारण ही आज भाजपा सत्ता में आई है। जब तक पार्टी उन नीतियों को जारी रखेगी तब तक यह सवाल ही नहीं उठता कि हम उसके साथ कुछ करेंगे।

येचुरी ने मोदी सरकार पर किसान विरोधी भूमि विधेयक को आगे बढ़ाने के लिए अड़ियल और आग्रही रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उनसे पूछा गया कि विधेयक को पारित न होने देने या राज्यसभा में इसे शिकस्त देने की विपक्ष की रणनीति कब तक जारी रहेगी येचुरी ने कहा, उन्हें इस सवाल का जवाब देना चाहिए कि आखिर वे उस विधेयक में संशोधन क्यों कर रहे हैं जिसका उन्होंने खुद 2013 में समर्थन किया था? इस विधेयक का उन्होंने 2013 में समर्थन किया था और विधेयक पारित हुआ था, कानून भाजपा के समर्थन से बना था।

येचुरी ने कहा, फिर आज वे उसमें संशोधन के लिए क्यों अड़े हुए हैं। संशोधन के लिए वे इतने आग्रही हैं कि इस मुद्दे पर तीसरी बार अध्यादेश जारी किया गया, जो कि अप्रत्याशित है। आईपीएल के दागी पूर्व आयुक्त ललित मोदी को लेकर हाल में उठे विवाद के बारे में उन्होंने पूरे मुद्दे की गहन जांच की मांग की।

उन्होंने कहा, पूरे आरोपों के मद्देनजर हमने गहन जांच की मांग की हैं। न्यायपालिका की प्रत्यक्ष निगरानी में एक विशेष जांच दल गठित किया जा सकता है और मेरे विचार से दोषी की पहचान करने और उसे सजा देने के लिए ऐसा किया जाना चाहिए। येचुरी ने आरोप लगाया कि आईपीएल धनशोधन का एक सबसे बड़ा रास्ता था और अगर मोदी सरकार काले धन के मुद्दे पर सचमुच गंभीर है तो उसे ललित मोदी विवाद पर तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।

यह पूछे जाने पर कि क्या कांग्रेस भाजपा की नीतियों, खास कर भूमि विधेयक का विरोध करने में पर्याप्त ईमानदार है, 62 वर्षीय माकपा नेता ने कहा, फिलहाल तो वे इसका विरोध कर रहे हैं। प्रतीत होता है कि वे विरोध जारी रखेंगे। जब तक वे विरोध करते रहेंगे, तब तक ठीक है। क्योंकि हम इसका सैद्धांतिक तौर पर विरोध कर रहे हैं। इसलिए यह अच्छा है कि एक मुद्दा है जिस पर हम साथ चल सकते हैं। कम से कम बंगाल में ,तृणमूल कांग्रेस को हराने के लिए, कांग्रेस के साथ गठबंधन करने की संभावना को लेकर पिछले सप्ताह तब अटकलें लगने लगी थीं जब माकपा की केंद्रीय समिति के सदस्य गौतम देव ने कहा था वामा मोर्चा के पास पर्याप्त ताकत नहीं है और उन्होंने कांग्रेस के साथ एक सहमति बनाने की संभावना का संकेत दिया था। देव ने कहा था, तृणमूल कांग्रेस को हराने के लिए समान विचारधारा वाले राजनीतिक दलों के साथ गठबंधन की जरूरत है। राज्य में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के एक वर्ग ने देव के इस बयान का स्वागत किया था।

इस बारे में येचुरी ने कहा, आप (मीडिया) जो कह रहे हैं और गौतम देव जो कह रहे हैं वह बिल्कुल अलग है। इस मुद्दे पर कि वाम मोर्चा तृणमूल कांग्रेस को हराने के लिए पर्याप्त मजबूत नहीं है, माकपा की राज्य समिति का यह आकलन हो सकता है। यह उनका आकलन हो सकता है ,मैं इस पर टिप्पणी कैसे कर सकता हूं। मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकता। मोदी सरकार के एक साल के कामकाज पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि राजग सरकार की बड़ी उपलब्धि पूर्ववर्ती संप्रग सरकार की नव उदारवादी नीतियों को जोरदार तरीके से, आगे बढ़ाना और आरएसएस के सांप्रदायिक एजेंडा का प्रसार करना है।

भविष्य में माकपा और भाकपा के विलय की संभावनाओं के बारे में पूछे जाने पर येचुरी ने कहा, विलय तत्काल एजेंडा में नहीं है। लेकिन हां, हमने तय किया है कि दोनों दल लोगों के संघर्ष को मजबूत बनाने के लिए साथ काम करते रहेंगे।

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