Jalukbari Assembly Seat Assam Election 2026: असम विधानसभा चुनाव 2026 में कई सीटें हाई-प्रोफाइल बन चुकी हैं, लेकिन जलुकबारी का मुकाबला सबसे ज्यादा चर्चा में है। यह सीट इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां से खुद राज्य के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा चुनाव मैदान में हैं। गुवाहाटी के शहरी इलाके में आने वाली यह सीट राजनीतिक रूप से हिमंत विश्व शर्मा का मजबूत गढ़ मानी जाती है, जहां पिछले कई चुनावों से उनका दबदबा रहा है। हालांकि कांग्रेस की तरफ से विदिशा नेओग इस बार शर्मा वर्चस्व को तोड़ने की पूरी कोशिश करेंगी।
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हिमंत विश्व शर्मा की प्रतिष्ठा दांव पर
जलुकबारी सीट से हिमंत विश्व शर्मा लगातार जीत दर्ज करते रहे हैं और यह उनका पारंपरिक निर्वाचन क्षेत्र बन चुका है। उन्होंने इस सीट से पहला चुनाव 2001 में जीता था और तब से वह लगातार यहां का प्रतिनिधित्व करते आ रहे हैं। बीजेपी में शामिल होने के बाद उनकी पहचान सिर्फ एक क्षेत्रीय नेता की नहीं रही, बल्कि वह पूर्वोत्तर की राजनीति के सबसे बड़े चेहरों में से एक हो चुके हैं। ऐसे में इस सीट का चुनाव उनके लिए सिर्फ जीत का सवाल नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिष्ठा का भी मुद्दा है।
कांग्रेस की विदिशा में कितना दम?
इस बार कांग्रेस ने हिमंत के मुकाबले विदिशा नेओग को मैदान में उतारा है, जो स्थानीय स्तर पर सक्रिय चेहरा मानी जाती हैं। कांग्रेस इस सीट पर हिमंत के बाद भले ही कमजोर हो गई हो, लेकिन वह इस बार मुकाबले को प्रतीकात्मक नहीं रहने देना चाहती। पार्टी का फोकस बीजेपी के बड़े चेहरे को चुनौती देकर राजनीतिक संदेश देने पर है। विदिशा भी इस बार पूरी कोशिश करेंगी कि हिमंता को उनके ही गढ़ में मात देकर सूबे की सियासत में अपना नाम स्वर्णाक्षरों में दर्ज करवा सकें। हालांकि पिछले कुछ चुनावों में हिमंता अपने प्रतिद्वंदियों से काफी आगे रहे हैं और बड़े अंतर से जीत दर्ज करते रहे हैं।
मुकाबले की तस्वीर क्या कहती है?
जलुकबारी में चुनावी समीकरण अन्य सीटों से थोड़ा अलग है। बीजेपी को यहां मजबूत संगठन और शहरी वोट बैंक और नेतृत्व का फायदा मिलता रहा है। वहीं, कांग्रेस स्थानीय मुद्दों और असंतोष को मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है। जलुकबारी सीट का नतीजा जो भी आए उसे पूरे असम की राजनीति के लिए संकेतक माना जाएगा। अगर हिमंत विश्व शर्मा यहां बड़े अंतर से जीतते हैं, तो यह उनकी मजबूत पकड़ और बीजेपी की स्थिति को और मजबूत करेगा। वहीं कांग्रेस अगर जीतती है या वोट शेयर बढ़ाने में सफल होती है, तो यह उसके लिए मनोबल बढ़ाने वाला परिणाम होगा।