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प्रकाश आंबेडकर ने दल-बदल कानून के फ्रेमवर्क पर सवाल उठाए, कहा- 'इस पर फिर से विचार करने की जरूरत'

 Edited By: Shakti Singh
 Published : Apr 25, 2026 09:41 am IST,  Updated : Apr 25, 2026 09:44 am IST

प्रकाश आंबेडकर का कहना है कि दल-बदल कानून का जो मौजूदा फ्रेमवर्क है, उसके कई मतलब निकाले जा सकते हैं। इस वजह से इसके गलत इस्तेमाल की आशंका बनी रहती है।

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प्रकाश आंबेडकर Image Source : PTI

राघव चड्ढा के पार्टी बदलने के बाद प्रकाश आंबेडकर ने दल-बदल कानून के फ्रेमवर्क में बदलाव की मांग की है। उनका कहना है कि मौजूदा फ्रेमवर्क के कई मतलब निकाले जा सकते हैं। इस वजह से इस कानून के दुरुपयोग की आशंका बढ़ जाती है। भारतीय संविधान के जनक बाबा साहेब आंबेडकर के पोते प्रकाश ने एक्स पर लिखा कि राघव चड्ढा आसानी से लेजिस्लेचर में दो-तिहाई सदस्यों के सपोर्ट पर आधारित मर्जर के तथाकथित “लीगल फिक्शन” का जिक्र कर रहे हैं, जो संवैधानिक नजरिए से दो पार्टियों के असली मर्जर को साबित करने में नाकाम रहता है।

प्रकाश आंबेडकर ने बताया कि दसवीं अनुसूची के तहत एंटी-डिफेक्शन प्रोविजन लेजिस्लेटर्स को सिर्फ खास न्यूमेरिकल कंडीशन के तहत मर्जर मानकर डिसक्वालिफिकेशन से बचाता है। यह अपने आप में, ऑर्गनाइजेशन के तौर पर पॉलिटिकल पार्टियों का असली मर्जर नहीं करता है।

कैसे होता है दो पार्टियों में मर्जर

प्रकाश आंबेडर ने एक्स पर लिखा, "दो पार्टियों के बीच मर्जर पूरी पॉलिटिकल पार्टी के लेवल पर होना चाहिए, न कि सिर्फ उसके लेजिस्लेटिव ग्रुप के अंदर या उसके लेजिस्लेटिव रिप्रेजेंटेटिव द्वारा। पॉलिटिकल पार्टियां नेशनल, स्टेट, डिस्ट्रिक्ट और लोकल लेवल पर ऑर्गेनाइजेशनल यूनिट्स वाली स्ट्रक्चर्ड एंटिटीज होती हैं। किसी भी लेजीटिमेट मर्जर के लिए जरूरी है कि पार्टी के कॉन्स्टिट्यूशन के अनुसार फैसला लिया जाए और सभी लेवल पर उसकी काबिल ऑर्गेनाइजेशनल बॉडीज द्वारा मंजूरी दी जाए। मुझे लगता है कि अब समय आ गया है कि हम एंटी-डिफेक्शन फ्रेमवर्क पर फिर से विचार करें क्योंकि इसके बहुत सारे अलग-अलग मतलब निकाले जा सकते हैं, जिससे स्ट्रेटेजिक इस्तेमाल या यूं कहें कि गलत इस्तेमाल की गुंजाइश बनती है।"

राघव चड्ढा ने क्या किया?

राघव चड्ढा ने शुक्रवार को आम आदमी पार्टी छोड़ बीजेपी में शामिल होने का ऐलान किया। राघव राज्यसभा सांसद हैं। वह अपने साथ छह अन्य सांसदों को लेकर बीजेपी में शामिल हुए हैं। नियम के तहत अगर किसी पार्टी के दो तिहाई सांसद या विधायक दूसरी पार्टी में शामिल होते हैं तो दल-बदल कानून नहीं लागू होता और उनकी सदस्यता बनी रहती है। आम आदमी पार्टी के 10 राज्यसभा सांसद हैं। इसी वजह से राघव समेत सात राज्यसभा सांसद बीजेपी में शामिल हुए हैं, जो कुल संख्या का दो तिहाई है और इन सभी सांसदों की सदस्यता बनी रहेगी।

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