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लद्दाख की पुगा घाटी में भारत के पहले दो जियोथर्मल कुओं का लोकार्पण, एलजी वीके सक्सेना ने बताया ऐतिहासिक उपलब्धि

 Published : Jul 17, 2026 09:22 pm IST,  Updated : Jul 17, 2026 09:22 pm IST

दोनों जियोथर्मल कुएं 14,000 फीट से ज्यादा ऊंचाई पर बनाए गए हैं। दोनों कुओं की गहराई 1000 मीटर से ज्यादा है। ये दोनों जियोथर्मल कुएं पुगा में प्रस्तावित 1 मेगावाट क्षमता वाली पायलट जियोथर्मल विद्युत परियोजना का अहम हिस्सा हैं।

VK Saxsena- India TV Hindi
जियोथर्मल कुओं का लोकार्पण करते वीके सक्सेना Image Source : REPORTER INPUT

लद्दाख के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने शुक्रवार पुगा घाटी में भारत के पहले और सबसे गहरे दो भू-तापीय (जियोथर्मल) कुओं का लोकार्पण किया। यह भारत के स्वच्छ ऊर्जा मिशन में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। इन कुओं का निर्माण ओएनजीसी एनर्जी सेंटर ने किया है। यह उपलब्धि लद्दाख में भारत के पहले जियोथर्मल पावर प्लांट की स्थापना की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। 14,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर बनाए गए 1,000-1,000 मीटर गहरे इन दोनों जियोथर्मल कुओं के शुरू होने से लद्दाख को नवीकरणीय ऊर्जा आधारित स्वच्छ ऊर्जा केंद्र बनाने की दिशा में बड़ी प्रगति होगी। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्बन-न्यूट्रल लद्दाख के विजन को साकार करने और भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा के लिए वैकल्पिक एवं नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के उपयोग के उनके आह्वान को भी यह परियोजना पूरा करती है। ये दोनों जियोथर्मल कुएं पुगा में प्रस्तावित 1 मेगावाट क्षमता वाली पायलट जियोथर्मल विद्युत परियोजना के सफल क्रियान्वयन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यह परियोजना भारत की पहली डेमोंस्ट्रेशन-स्केल जियोथर्मल पावर परियोजना होगी।

ONGC Engineer
Image Source : REPORTER INPUTजियोथर्मल कुओं के लोकार्पण के दौरान ओएनजीसी के इंजीनियर

कई महीनों की देरी के बाद पूरी हुई परियोजना

लद्दाख प्रशासन, लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद लेह और ओएनजीसी एनर्जी सेंटर के बीच पहले हुए त्रिपक्षीय समझौते की अवधि समाप्त होने के कारण इस परियोजना में कई महीनों की देरी हुई थी। परियोजना के रणनीतिक महत्व को देखते हुए उपराज्यपाल श्री वीके सक्सेना ने व्यक्तिगत हस्तक्षेप कर इस वर्ष जून में एमओयू को अगले पांच वर्षों के लिए नवीनीकृत कराया, जिसके बाद दोनों जियोथर्मल कुओं का कार्य फिर से शुरू हुआ। इन दोनों कुओं के सफल निर्माण से भू-तापीय जलाशय का मूल्यांकन, बिजली संयंत्र की योजना और लद्दाख में भू-तापीय ऊर्जा के व्यावसायिक विकास का मार्ग प्रशस्त होगा।

Geothermal wells
Image Source : REPORTER INPUTजियोथर्मल कुएं

135 डिग्री सेल्सियस तक तापमान रिकॉर्ड

परियोजना के इंजीनियरों ने बताया कि 400 मीटर की गहराई पर अधिकतम 135 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया है। आगे की जांच जारी है और उम्मीद है कि इससे भी अधिक तापमान प्राप्त होगा, जिससे 1 मेगावाट पायलट परियोजना के संचालन और भविष्य में व्यावसायिक स्तर पर भू-तापीय ऊर्जा के उपयोग का रास्ता खुलेगा। यह परियोजना दुनिया के सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में से एक में पूरी की गई है, जहां अत्यधिक ठंड, दुर्गम भू-भाग और सीमित कार्य अवधि जैसी कठिन परिस्थितियां हैं। इन चुनौतियों के बावजूद पहला जियोथर्मल कुआं 22 मई 2026 को सफलतापूर्वक 1,000 मीटर की गहराई तक ड्रिल किया गया। इसके बाद दूसरा कुआं 3 जून 2026 को शुरू किया गया और रिकॉर्ड समय में, महज एक महीने से कुछ अधिक समय में, 8 जुलाई 2026 को इसे भी 1,000 मीटर की गहराई तक सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया।

ONGC team
Image Source : REPORTER INPUTओएनजीसी के इंजीनियरों की टीम

वीके सक्सेना ने बताया ऐतिहासिक उपलब्धि

इस अवसर पर उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने कहा कि जियोथर्मल कुओं का लोकार्पण भारत की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि और लद्दाख के कार्बन-न्यूट्रल भविष्य की दिशा में एक निर्णायक क्षण है। उन्होंने कहा, "यह जियोथर्मल पावर परियोजना लद्दाख के समग्र विकास के लिए उत्प्रेरक का कार्य करेगी। वैज्ञानिक महत्व के अलावा यह पहल लद्दाख की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगी, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देगी और क्षेत्र के सामाजिक एवं आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगी। पुगा घाटी में हासिल की गई यह सफलता भारत के नेट-जीरो लक्ष्य की दिशा में एक मॉडल बनेगी तथा लद्दाख को कार्बन-न्यूट्रल और पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ क्षेत्र बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।"

Geotharmal wells
Image Source : REPORTER INPUTजियोथर्मल कुएं

ओएनजीसी के इंजीनियरों की तारीफ

उपराज्यपाल ने ओएनजीसी के इंजीनियरों की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय इंजीनियर और तकनीशियन दुनिया के सर्वश्रेष्ठ इंजीनियरों में शामिल हैं और सबसे कठिन इंजीनियरिंग चुनौतियों को सफलतापूर्वक पूरा करने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने परियोजना से जुड़े सभी कर्मचारियों और श्रमिकों के साहस, दृढ़ संकल्प और अथक परिश्रम की भी प्रशंसा की।

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