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बेटे की मौत का सदमा नहीं सह पाई मां, कुछ ही मिनटों में तोड़ा दम, घर से एक साथ उठीं दो अर्थियां

 Edited By: Mangal Yadav @MangalyYadav
 Published : Jun 16, 2026 02:39 pm IST,  Updated : Jun 16, 2026 02:56 pm IST

इंदौर में एक मां अपने बेटे की मौत का सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाई और उसकी भी मौत हो गई। परिवार में एक साथ दो अर्थियां उठी और दोनों मां-बेटे का एक साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया।

मां-बेटे की फाइल फोटो- India TV Hindi
मां-बेटे की फाइल फोटो Image Source : REPORTER

इंदौर के भंडारी मिल क्षेत्र स्थित श्रीनाथ विहार अपार्टमेंट में एक बेहद भावुक और हृदय विदारक घटना सामने आई है। 55 वर्षीय राजुल शर्मा की मौत के बाद उनकी 75 वर्षीय मां किरण शर्मा भी बेटे का शव देखते ही सदमे में चल बसीं। सोमवार को जब मां और बेटे की एक साथ अर्थियां उठीं तो पूरे परिवार, रिश्तेदारों और पड़ोसियों की आंखें नम हो गईं। इस दुखद घटना ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया है।

बेटे का शव देखकर फूट-फूटकर रोने लगीं, फिर तोड़ा दम

दरअसल कंप्यूटर डिजाइनर राजुल शर्मा का रविवार को निधन हो गया था। उस समय उनकी मां किरण शर्मा अपनी बेटी के घर एरोड्रम रोड पर थीं। परिजनों ने उन्हें अचानक जानकारी देने के बजाय धीरे-धीरे घर लाने का निर्णय लिया, ताकि उन्हें गहरा सदमा न पहुंचे। लेकिन जैसे ही किरण शर्मा फ्लैट में पहुंचीं और बेटे का शव देखा, वे फूट-फूटकर रोने लगीं। बेटे के सिर पर हाथ फेरते ही वे अचानक बेहोश होकर गिर पड़ीं। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। 

परिवार में पहले से रहा है हार्ट अटैक का इतिहास

परिजनों के अनुसार मां और बेटे दोनों की पहले बायपास सर्जरी हो चुकी थी और परिवार में हृदय रोग (हार्ट अटैक) का इतिहास भी रहा है। कुछ घंटों के भीतर मां-बेटे की मौत से परिवार पूरी तरह टूट गया है। इस गहरे दुख के बीच परिवार ने मानवता का परिचय देते हुए दोनों का नेत्रदान कराया। मुस्कान ग्रुप की मदद से हुई इस प्रक्रिया से चार लोगों को नई रोशनी मिल सकेगी। मां-बेटे की अंतिम यात्रा में शामिल हर शख्स की आंखें नम थीं।

नेत्रदान से दी चार लोगों को रोशनी

गहरे दुख के बावजूद, परिवार ने मृतक की आंखें दान करके उन्हें सम्मान देने का फैसला किया। एक एनजीओ की मदद से नेत्रदान की प्रक्रिया आसानी से पूरी हो गई। उम्मीद है कि कॉर्निया से चार लोगों की आंखों की रोशनी लौट आएगी। शर्मा परिवार अकेला ऐसा परिवार नहीं है जिसने ऐसा नेक काम किया है। हाल के दिनों में धनवंती देवी लालवानी, सरदारनी नरेंद्र कौर और नंदलाल पुरनानी के परिवारों ने भी अपने प्रियजनों के निधन के बाद आंखें दान कीं और इंदौर में प्रेरणादायक उदाहरण पेश किए। स्थानीय प्रशासन और स्वयंसेवी संस्थाएं नेत्रदान को बढ़ावा दे रही हैं और नागरिकों से इस नेक काम पर विचार करने का आग्रह कर रही हैं, क्योंकि यह मृत्यु के बाद भी लोगों की जिंदगी बदल सकता है।

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रिपोर्ट- भारत पाटिल

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