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मदद से मुकरी पंचायत, रीवा में बाढ़ के खौफनाक मंजर के बीच ड्रम पर हुआ अंतिम सफर

 Written By: India TV MP Bureau Desk
 Published : Aug 24, 2026 06:48 pm IST,  Updated : Aug 24, 2026 06:48 pm IST

रीवा के रौली गांव में बाढ़ के पानी के कारण मोतीलाल तिवारी के शव को प्लास्टिक ड्रमों से बांधकर घर पहुंचाया गया। परिजनों ने पंचायत पर मदद न करने और असंवेदनशीलता का गंभीर आरोप लगाया है।

Rewa- India TV Hindi
मृतक को ले जाते लोग। Image Source : REPORTER INPUT

मध्य प्रदेश के रीवा जिले से इंसानियत को झकझोर देने वाला और प्रशासनिक दावों की पोल खोलता एक मामला सामने आया है। सिरमौर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले जवा जनपद की ग्राम पंचायत रौली में बाढ़ के प्रकोप के कारण एक शोकाकुल परिवार को अंतिम यात्रा के दौरान भारी दुश्वारियों का सामना करना पड़ा। जानकारी के अनुसार रौली गांव के निवासी मोतीलाल तिवारी का रीवा के संजय गांधी अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया था। अस्पताल से जब उनका शव गांव स्थित घर ले जाया जा रहा था, तब गांव में चारों तरफ फैले बाढ़ के पानी ने रास्ता पूरी तरह से रोक दिया। जलभराव इतना अधिक था कि घर तक सामान्य रूप से पैदल या वाहन से पहुंचना नामुमकिन हो गया।

स्थानीय लोगों ने खुद बनाई जल-नौका

ऐसी विकट परिस्थिति में जब कोई सरकारी मदद नहीं मिली तो ग्रामीणों को खुद ही व्यवस्था करनी पड़ी। स्थानीय लोगों ने जुगाड़ का रास्ता अपनाते हुए प्लास्टिक के ड्रमों को आपस में कसकर बांधा और उसके ऊपर शव को रखा। इसके बाद पानी के तेज बहाव और जलभराव के बीच ड्रम को तैरते हुए किसी तरह घर तक पहुंचाया गया, जिसके बाद परिजनों ने अश्रुपूरित आंखों से अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की। इस हृदयविदारक घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है और ग्रामीण क्षेत्रों में बाढ़ प्रबंधन की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

महिला सरपंच और जीआरएस पर मदद न करने का आरोप

घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। परिजनों ने स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों पर सीधे तौर पर असंवेदनशीलता के आरोप लगाए हैं। परिजनों का दावा है कि जब शव को पानी से पार कराने के लिए महिला सरपंच, उनके देवर और रोजगार सहायक (जीआरएस) विवेक तिवारी से मदद मांगी गई, तो उन्होंने यह कहते हुए साफ इनकार कर दिया कि यह हमारा काम नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि प्राकृतिक आपदा और बाढ़ के कारण रास्ते बंद होने से आम जनता पहले ही परेशानियों से जूझ रही है। ऐसे संकट के समय में किसी मृतक के शव को सम्मानपूर्वक घर तक पहुंचाने के लिए भी अगर ग्रामीणों को ड्रम का सहारा लेना पड़े, तो यह जमीनी स्तर पर सिस्टम के दावों की सचाई को उजागर करता है। ग्रामीणों ने इस पूरे मामले में पंचायत प्रतिनिधियों के रवैये की निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है।

अशोक मिश्रा की रिपोर्ट

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