महाराष्ट्र में संरक्षण कार्यक्रम के तहत प्राकृतिक आवास में छोड़े गए एक भारतीय गिद्ध ने 56 दिन में 1,600 किलोमीटर से अधिक की उड़ान भरकर यह साबित कर दिया कि वह जंगल में सफलतापूर्वक जीवन जीने में सक्षम है। वन्यजीव विशेषज्ञों की टीम ने गिद्ध की निगरानी की।'बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी' (BNHS) के शोधकर्ताओं ने बताया कि 'जे132' नाम से चिह्नित इस गिद्ध ने 17 जून को एक ही दिन में 168 किलोमीटर की सबसे लंबी उड़ान भरी।
बीएनएचएस के अनुसार, इस गिद्ध को 7 जून को नासिक में तीसरी बार प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया था। इससे पहले दो बार उसे जंगल में छोड़ा गया, लेकिन उसकी शारीरिक स्थिति और जीवित रहने की संभावनाओं को बेहतर बनाने के लिए दोबारा पकड़कर देखभाल की गई थी।
प्राकृतिक वातावरण के साथ सामंजस्य का शानदार प्रदर्शन
संस्था ने एक बयान में कहा कि पिछले 8 सप्ताह के दौरान यह गिद्ध 1,618 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर चुका है। इस दौरान उसने लंबी उड़ान भरने की क्षमता, जंगल में जीवित रहने के कौशल और प्राकृतिक वातावरण के साथ सफल सामंजस्य का शानदार प्रदर्शन किया है।
जंगली गिद्धों के साथ भोजन करता दिखाई दिया
बीएनएचएस के निदेशक किशोर रिठे ने कहा, 'सबसे अहम बात यह है कि हमारी निगरानी टीम ने नासिक के ढोल ओहोल और देवडोंगरा क्षेत्रों में 'जे132' को कई जंगली गिद्धों के साथ उड़ते और प्रवास करते देखा।' उन्होंने बताया, 'मूसलाधार बारिश के दौरान भी यह गिद्ध अपने दम पर मृत मवेशियों को खोजकर जंगली गिद्धों के साथ भोजन करता दिखाई दिया। इससे साबित होता है कि वह व्यवहारिक रूप से पूरी तरह प्राकृतिक जीवन के अनुरूप ढल चुका है।'
एकदिवसीय उड़ान में 168 किलोमीटर दर्ज
उपग्रह आधारित निगरानी से पता चला है कि पिछले 8 सप्ताह के दौरान इस गिद्ध ने प्रतिदिन औसतन लंबी दूरी तय की। इसकी सबसे लंबी एकदिवसीय उड़ान 17 जून को 168 किलोमीटर दर्ज की गई। इस दौरान यह उत्तरी नासिक के उन इलाकों में सक्रिय रहा, जिन्हें गिद्धों का महत्वपूर्ण आवास माना जाता है। इसके अलावा यह महाराष्ट्र-गुजरात सीमा से लगे क्षेत्रों तक पहुंचा।
बीएनएचएस ने बताया कि इस गिद्ध को पहली बार 11 दिसंबर 2025 को पेंच बाघ अभयारणय में निगरानी प्रजनन कार्यक्रम के तहत पाले गए भारतीय गिद्धों के दूसरे समूह के साथ छोड़ा गया था। उस समय उसने मात्र 20 दिन में 750 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर नासिक तक उड़ान भरी थी, लेकिन उसकी शारीरिक क्षमता को और बेहतर बनाने के लिए शोधकर्ताओं ने उसे फिर पकड़ लिया।
यह गिद्ध पूरी तरह जंगल के जीवन में रम चुका
इसके बाद इस साल दूसरी बार भी उसे जंगल में छोड़ा गया, लेकिन कुछ समय बाद दोबारा पकड़ लिया गया। अंततः 7 जून को नासिक में तीसरी बार प्राकृतिक आवास में छोड़े जाने के बाद उसने लगातार 56 दिन जंगल में बिताए। इस दौरान उसने दिशा पहचानने की असाधारण क्षमता, अपने पसंदीदा क्षेत्र से जुड़ाव और जीवित रहने की मजबूत प्रवृत्ति का परिचय दिया। रिठे ने कहा कि अब यह गिद्ध पूरी तरह जंगल के जीवन में रम चुका है। (भाषा के इनपुट के साथ)
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