केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी द्वारा लिखित पुस्तक 'संघातील मानवीय व्यवस्थापन' का विमोचन शुक्रवार को RSS के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर की प्रमुख उपस्थिति में हुआ। पुस्तक के विमोचन के मौके पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा, 'पैसा कमाना गुनाह नहीं है। मैं सभी कार्यकर्ताओं को बताता हूं कि पैसा कमाना चाहिए, लेकिन राजनीती पैसा कमाने का धंधा नहीं है।'
गडकरी ने स्वामी विवेकानंद के विचारों का उदाहरण देते हुए कहा, 'no philosophy can be taught to empty stomach.' केंद्रीय मंत्री गडकरी ने आगे कहा, 'वो ज्ञानी नहीं है, मेरिट के विद्यार्थी नहीं हैं। पिक्चर सामने से देखने वाले और नाटक पीछे से देखने वाला क्लास में से आया हूं। परसों देहरादून में मुझे 13वीं डिलीट मिलेगी। मैं डॉक्टर नहीं लगता हूं। मैं प्रमाणित तौर पर कहता हूं कि मैं इंजीनियरिंग की एडमिशन क्वालीफाई नहीं कर पाया। मैं फिर डॉक्टर कैसे लिखूं। 12वीं में 52% अंक मिले थे।
एक घंटाना का जिक्र करते हुए गडकरी ने कहा की ज्यादा विचार करता तो सरकारी नौकर बनते, वो डेयरडेविल हैं, निर्णय लेने का ढांढस रखता हूं। यह उनकी कैपिटल है। गडकरी ने कहा कि उनके जीवन का सबसे बड़ा काम साइकिल रिक्शा कि जगह ई रिक्शा लाना रहा है, क्योंकि साइकिल रिक्शा में मानव, मानव को खींचना था। वह काफी कष्टदायक था।
गडकरी ने कहा, 'साल 2014 में जब वो पहली बार मंत्री बने तो वो सोचे कि 1 करोड़ व्यक्ति आदमी आदमी को खींचता है। दीनदयाल उपाध्याय ने कहा था कि ये मानवी शोषण है। जिस दिन यह बंद होगा। वह देश के लिए सुनहरा दिन होगा। गडकरी ने कहा कि उन्होंने सोच लिया था कि एक बार नहीं 10 बार कानून तोड़ना पड़ेगा तो तोड़ेंगे।'
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