नई दिल्ली। सरकार ने भी स्वयं यह स्वीकार किया है कि 8 नवंबर को 500 और 1000 रुपए के नोटों को बंद करने की घोषणा के बाद दिसंबर में देश के औद्योगिक उत्पादन पर नोटबंदी का नकारात्मक असर हुआ है।
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि,
दिसंबर में औद्योगिक उत्पादन (आईआईपी) में गिरावट नोटबंदी की वजह से है और आगामी महीनों में इसमें बढ़ोतरी होगी।
- वित्त मंत्री ने कहा कि नवंबर और दिसंबर के आईआईपी के आंकड़ों के आधार पर पूरे साल के लिए अनुमान लगाना ठीक नहीं होगा।
- यह नोटबंदी की अवधि थी।
- नवंबर की तुलना में दिसंबर अधिक चुनौतीपूर्ण था क्योंकि नवंबर में कई क्षेत्रों में पुरानी करेंसी के इस्तेमाल की अनुमति थी।
- दिसंबर में यह पूरी तरह समाप्त हो गई।
- उन्होंने कहा कि दिसंबर में नई करेंसी डालने का काम शुरुआती चरण में था।
- इसके साथ ही अनौपचारिक और औपचारिक अर्थव्यवस्था का एकीकरण हो रहा था।
- आगामी महीनों में संभवत: आप औपचारिक अर्थव्यवस्था में अधिक विस्तार के संकेतक देखेंगे।
- दिसंबर में औद्योगिक उत्पादन 0.4 प्रतिशत घटा है।
- इस दौरान टिकाऊ उपभोक्ता सामान क्षेत्र के उत्पादन में 10 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है।
- आंकड़ों में गिरावट का प्रमुख कारण 8 नवंबर 2016 को सरकार द्वारा की गई नोटबंदी थी, साथ ही मौसमी कारक भी रहे हैं।
- आईआईपी के आंकड़ों के मुताबिक नवंबर में औद्योगिक उत्पादन में 5.7 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी, जबकि पिछले साल दिसंबर में यह (-)0.9 फीसदी थी।