1. Hindi News
  2. पैसा
  3. बिज़नेस
  4. वित्त वर्ष 2015-16 में राजकोषीय घाटा 3.9 फीसदी से कम रहने की उम्मीद: वित्त मंत्रालय

वित्त वर्ष 2015-16 में राजकोषीय घाटा 3.9 फीसदी से कम रहने की उम्मीद: वित्त मंत्रालय

 Written By: Abhishek Shrivastava
 Published : Apr 02, 2016 01:20 pm IST,  Updated : Apr 02, 2016 01:20 pm IST

वित्त मंत्रालय को टैक्‍स प्राप्तियों व विनिवेश से आय के मद्देनजर वित्‍त वर्ष 2015-16 के लिए राजकोषीय घाटा जीडीपी के 3.9 फीसदी से कम रहने की उम्मीद है।

वित्‍त वर्ष 2015-16 में राजकोषीय घाटा 3.9 फीसदी से कम रहने की उम्मीद: वित्त मंत्रालय- India TV Hindi
वित्‍त वर्ष 2015-16 में राजकोषीय घाटा 3.9 फीसदी से कम रहने की उम्मीद: वित्त मंत्रालय

नई दिल्ली। वित्‍त मंत्रालय ने कहा है कि टैक्‍स प्राप्तियों व विनिवेश से आय के मद्देनजर वित्‍त वर्ष 2015-16 के लिए राजकोषीय घाटा जीडीपी के 3.9 फीसदी से नीचे रहने की उम्मीद है। वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि सरकार राजकोषीय सुदृढ़ीकरण की राह के लिए प्रतिबद्ध है और शुरुआती अनुमानों के अनुसार 2015-16 के लिए राजकोषीय घाटा 3.9 फीसदी से कम ही रहेगा।

राजकोषीय सुदृढ़ीकरण खाके के अनुसार मौजूदा वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा जीडीपी का 3.5 फीसदी रहना अनुमानित है। मंत्रालय का कहना है कि टैक्‍स राजस्व प्राप्तियां सही राह पर हैं और 2015-16 के संशोधित लक्ष्य पूरी तरह हासिल कर लिए जाने की उम्मीद है। संशोधित अनुमानों के अनुसार डायरेक्‍ट टैक्‍स (निगमित व आयकर) से 7.52 लाख करोड़ रुपए जबकि इनडायरेक्‍ट टैक्‍स (उत्पाद, सीमा शुल्क व सेवाकर) से 7.03 करोड़ रुपए आएंगे। विनिवेश लक्ष्य के बारे में मंत्रालय का कहना है कि मार्च 2016 को समाप्त वित्त वर्ष में विनिवेश के जरिये अब तक 25,000 करोड़ रुपए जुटाए गए हैं।

बैंक यूनियनों ने 25 मई को हड़ताल की चेतावनी दी

बैंक यूनियनों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर 25 मई को एक बार फिर देशव्यापी हड़ताल करने की चेतावनी दी है। ऑल इंडिया बैंक्स एंपलाइज एसोसिएशन (एआईबीईए) ने सार्वजनिक बैंकों के निजीकरण की सरकार की योजनाओं तथा अन्य मुद्दों को लेकर इस हड़ताल की घोषणा की है। एआईबीईए के महासचिव सी एच वेंकटचलम ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा, हम अपनी विभिन्न मांगों को लेकर 25 मई को हड़ताल पर रहेंगे।

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Business से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें पैसा