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देश का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड ऊंचाई पर, बढ़त के साथ 545 अरब डॉलर के ऊपर

 Edited By: India TV Paisa Desk
 Published : Oct 09, 2020 08:44 pm IST,  Updated : Oct 09, 2020 08:44 pm IST

इससे पहले 25 सितंबर को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 3.017 अरब डॉलर घटकर 542.021 अरब डॉलर रह गया था। जून 2020 के पहले हफ्ते में विदेशी मुद्रा भंडार 500 अरब डॉलर के स्तर को पार कर गया था, जिसके बाद से भंडार इस स्तर के ऊपर ही बना हुआ है।

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रिकॉर्ड ऊंचाई पर विदेशी मुद्रा भंडार Image Source : FILE

नई दिल्ली। देश का विदेशी मुद्रा भंडार दो अक्टूबर, 2020 को समाप्त हुए सप्ताह में 3.618 अरब डॉलर बढ़कर 545.63 अरब डॉलर की  रिकॉर्ड ऊंचाई को छू गया। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को विदेशी मुद्रा भंडार से जुड़े आंकड़े जारी किए। इससे पहले 25 सितंबर को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 3.017 अरब डॉलर घटकर 542.021 अरब डॉलर रह गया था। सप्ताह के दौरान विदेशी मुद्रा भंडार में तेजी की प्रमुख वजह विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (एफसीए) का बढ़ना है। यह कुल विदेशी मुद्रा भंडार का एक अहम अंग होता है। इस दौरान एफसीए 3.104 अरब डॉलर बढ़कर 503.046 अरब डॉलर हो गया। रिजर्व बैंक के आंकड़े दर्शाते हैं कि इस सप्ताह के दौरान देश का कुल स्वर्ण भंडार 48.6 करोड़ डॉलर बढ़कर 36.486 अरब डॉलर हो गया। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से मिला विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) 40 लाख डॉलर बढ़कर 1.476 अरब डॉलर हो गया। आंकड़ों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के पास जमा देश का विदेशी मुद्रा भंडार भी 2.3 करोड़ डॉलर बढ़कर 4.631 अरब डॉलर हो गया। 

किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए विदेशी मुद्रा भंडार काफी अहम होता है। साल 1991 में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार सिर्फ 1.1 अरब डॉलर के स्तर पर आ गया था, उस वक्त ये रकम 2 से 3 हफ्ते के आयात बिल के लिए भी पर्याप्त नहीं थी। फिलहाल भारत का विदेशी मुद्रा भंडार करीब डेढ़ साल के आयात के लिए पर्याप्त है। साल 2004 में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार ने 100 अरब डॉलर की सीमा पार की थी, वहीं जून 2020 के पहले हफ्ते में विदेशी मुद्रा भंडार 500 अरब डॉलर के स्तर को पार कर गया। जून के बाद से विदेशी मुद्रा भंडार लगातार 500 अरब डॉलर के स्तर से ऊपर ही बना हुआ है। चीन से आयात कम होने और मांग और कीमतें घटने से कच्चे तेल के आयात बिल में कमी आने से भी विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिली है।  

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