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अमेरिका का बढ़ा इंडियन इकोनॉमी पर भरोसा, भारत टॉप आठ विदेशी मुद्रा भंडार वाले देशों में शामिल

 Written By: Dharmender Chaudhary
 Published : Oct 20, 2015 02:12 pm IST,  Updated : Oct 20, 2015 02:12 pm IST

भारत दुनिया के टॉप 8 विदेशी मुद्रा भंडार वाले देशों की सूची में शामिल हो गया है। अमेरिका ने भी अब भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था पर भरोसा दिखाना शुरू कर दिया है।

अमेरिका का बढ़ा इंडियन इकोनॉमी पर भरोसा, भारत टॉप आठ विदेशी मुद्रा भंडार वाले देशों में शामिल- India TV Hindi
अमेरिका का बढ़ा इंडियन इकोनॉमी पर भरोसा, भारत टॉप आठ विदेशी मुद्रा भंडार वाले देशों में शामिल

वाशिंगटन दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका ने भी अब भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था पर भरोसा दिखाना शुरू कर दिया है। US डिपार्टमेंट ऑफ ट्रेजरी की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में नए सुधार एजेंडे से उसकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक उभरते बाजारों के कमजोर इकोनॉमिक आउटलुक के बावजदू भारत की स्थिति बेहतर है। इसकी एक वजह भारत में विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार हो रही वृद्धि भी है। विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोत्‍तरी होने की वजह से भारत दुनिया टॉप 8 देशों की सूची में शामिल हो गया है, जिनके पास सबसे ज्‍यादा विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है।
ऑल टाइम हाई पर भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 
क्रूड की कीमतों में आई गिरावट से भारत ने 44 अरब डॉलर की बचत की है। इसके कारण कुल विदेशी मुद्रा भंडार 328 अरब डॉलर पहुंच गया है, जो कि मासिक औसत के लिहाज से अब तक का उच्चतम स्तर है। इस तरह भारत विदेशी मुद्रा भंडार के लिहाज से आठ टॉप देशों में शामिल हो गया। यह बात US डिपार्टमेंट ऑफ ट्रेजरी ने अपनी इंटरनेशनल इकोनॉमिक एंड एक्सचेंज रेट पॉलिसी संबंधी रिपोर्ट में कही है।
चीन की कमजोरी ग्‍लोबल अर्थव्‍यवस्‍था पर भारी
US डिपार्टमेंट ऑफ ट्रेजरी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि सभी उभरती अर्थव्यवस्थाओं की ग्रोथ का आउटलुक कमजोर है, जिसका असर ग्लोबल इकोनॉमी पर बढ़ रहा है। चीन के घरेलू निवेश और कमोडिटी इंपोर्ट के साथ मशीनरी कल-पुर्जे की मांग में कमजोरी अन्य अर्थव्यवस्थाओं पर भारी असर डाल रहे हैं।

भारत की स्थिति बेहतर 
रिपोर्ट में कहा गया सकारात्मक बात यह है कि नए सुधार के एजेंडे से भारत में स्थिति बेहतर हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक ब्राजील की मंदी के दूसरे साल में प्रवेश कर रहा है। इसके कारण लैटिन अमेरिका की आर्थिक ग्रोथ नहीं होने की आशंका है। इधर रूस खराब आर्थिक मैनेजमेंट, क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट और आर्थिक प्रतिबंध से जूझ रहा है।
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