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अमेरिकी दबाव के दौर में चीनी निवेश पर प्रतिबंध हटाने की वकालत, नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष ने दी ये सलाह

Edited By: Alok Kumar @alocksone Published : Aug 14, 2025 12:12 pm IST, Updated : Aug 14, 2025 12:12 pm IST

अमेरिका लगातार भारत पर दबाब की राजनीति कर रहा है। इस बीच नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने चीनी निवेश पर प्रतिबंध हटाने की सलाह दी है।

Union External Affairs Minister S Jaishankar and Chinese President Xi Jinping- India TV Paisa
Photo:PTI केंद्रीय विदेश मंत्री एस जयशंकर और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग

नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने अमेरिकी दबाव के दौर के बीच चीन से भारत में निवेश पर प्रतिबंध हटाने की वकालत की है। उन्होंने कहा कि इससे घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा एवं रोजगार सृजन होगा। कुमार ने कहा कि चीन अन्य देशों में एक महत्वपूर्ण विदेशी निवेशक बन गया है और भारत को उस निवेश की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इसलिए, मेरा मानना है कि भारत में चीनी निवेश की अनुमति देने पर गंभीरता से विचार करने का समय आ गया है। भारत और चीन ने द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने के लिए पिछले कुछ महीनों में कई कदम उठाए हैं। जून 2020 में दोनों देशों की सेनाओं के बीच हिसंक झड़पों के बाद से द्विपक्षीय संबंध काफी खराब हो गए थे। कुमार ने कहा कि मैं स्पष्ट रूप से कहता हूं कि मुझे लगता है कि अब ‘प्रेस नोट-3’ को हटाने का समय आ गया है जो पड़ोसी देशों से निवेश को नियंत्रित करता है।

‘प्रेस नोट 3’ के तहत लगा हुआ है बैन

कुमार ने कहा कि जैसा कि आप जानते हैं, एकमात्र पड़ोसी देश जो मायने रखता है वह चीन है। सरकार ने 2020 के ‘प्रेस नोट 3’ के तहत भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देशों से विदेशी निवेश के लिए पूर्वानुमति अनिवार्य कर दी है। ये देश चीन, बांग्लादेश, पाकिस्तान, भूटान, नेपाल और अफगानिस्तान हैं। उन्होंने कहा कि चीन से निवेश आने से भारत में स्थानीय स्तर पर चीजें बनाने में मदद मिलेगी। कुमार ने कहा कि अगर आप चीनी विनिर्माण निवेश की अनुमति देते हैं, तो वे यहां विनिर्माण करेंगे, उत्पादन करेंगे और संभवतः वे भारत से निर्यात भी कर सकेंगे।

सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बनकर उभरा

आर्थिक शोध संस्थान ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) के आंकड़ों के अनुसार चीन, भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बनकर उभरा है जिसका 2023-24 में द्विपक्षीय कारोबार 118.4 अरब अमेरिकी डॉलर रहा था जो अमेरिका से थोड़ा अधिक है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस महीने के अंत में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन की यात्रा करने की उम्मीद है। वह सात साल से अधिक समय के बाद चीन की यात्रा कर सकते हैं। 

एससीओ सम्मेलन में भाग लेने की उम्मीद

मोदी 29 अगस्त के आसपास जापान की यात्रा पर जाएंगे। यात्रा समाप्त होने के बाद वह शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के लिए तियानजिन जाएंगे। एससीओ शिखर सम्मेलन 31 अगस्त और एक सितंबर को आयोजित किया जाएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने की घोषणा पर किए एक सवाल के जवाब में कुमार ने कहा कि हमें इसके प्रभाव को कम करने के लिए कदम उठाने की जरूरत है। 

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