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क्रूड पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल पर एक्सपोर्ट प्राइस बढ़ने से किसानों को होगा काफी फायदा, जानिए कैसे

 Edited By: Pawan Jayaswal
 Published : Sep 14, 2024 02:23 pm IST,  Updated : Sep 14, 2024 02:25 pm IST

मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के अलावा अन्य प्रमुख तिलहन उत्पादक राज्य गुजरात, राजस्थान, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु हैं।

खाद्य तेल- India TV Hindi
खाद्य तेल Image Source : FILE

कच्चे पाम और रिफाइंड सूरजमुखी तेल पर सीमा शुल्क बढ़ाकर क्रमश: 20 प्रतिशत और 32.5 प्रतिशत करने के सरकार के फैसले से किसानों को "काफी" लाभ होगा, क्योंकि इससे उनकी आय बढ़ेगी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने शनिवार को यह उम्मीद जताई। उन्होंने कहा कि न्यूनतम निर्यात मूल्य हटाने और प्याज पर निर्यात शुल्क में कटौती के फैसले से देश के किसानों को भी मदद मिलेगी। वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, कच्चे पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी बीज के तेल पर मूल सीमा शुल्क शून्य से बढ़ाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया है। रिफाइंड पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल पर मूल सीमा शुल्क 12.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 32.5 प्रतिशत कर दिया गया है। इन कच्चे और रिफाइंड तेलों पर प्रभावी शुल्क क्रमशः 5.5 प्रतिशत से बढ़कर 27.5 प्रतिशत और 13.75 प्रतिशत से बढ़कर 35.75 प्रतिशत हो जाएगा।

सोयाबीन और तिलहन किसानों को फायदा

अधिकरी ने कहा,“ये सोयाबीन और तिलहन किसानों के लिए बहुत बड़ी मदद है। महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के किसानों को इससे बहुत लाभ होगा, क्योंकि इन तिलहनों का उत्पादन यहां बहुत अधिक होता है।” अधिकारी ने कहा कि ये उपाय सरकार के प्रभावी प्रबंधन के कारण संभव हो पाए हैं, जिससे पिछले करीब दो वर्षों से लगातार गिर रहीं खाद्य तेल की घरेलू कीमतों पर नियंत्रण रखा जा सके। अधिकारी ने कहा, "बाजार की धारणा को प्रभावित किए बिना सोया किसानों को समर्थन देने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए ये बहुत ही समझदारी भरा कदम हैं।"

कीमतों में आएगी गिरावट

मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के अलावा अन्य प्रमुख तिलहन उत्पादक राज्य गुजरात, राजस्थान, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु हैं। सरकार ने पहले न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) के रूप में 550 डॉलर प्रति टन तय किया था, जिसका अनिवार्य रूप से मतलब था कि किसान अपनी उपज इस दर से कम पर विदेशों में नहीं बेच सकते थे। शुक्रवार को जारी विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) की अधिसूचना ने तत्काल प्रभाव से एमईपी को हटा दिया। सरकार ने प्याज के निर्यात पर शुल्क को 40 प्रतिशत से घटाकर 20 प्रतिशत कर दिया है।‘बैंगलोर रोज प्याज’ पर कोई निर्यात शुल्क नहीं है। पिछले सप्ताह उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने कहा था कि आने वाले महीनों में प्याज की उपलब्धता और कीमतों का पूर्वानुमान सकारात्मक बना हुआ है, क्योंकि खरीफ (गर्मी) में प्याज की बुवाई का रकबा अगस्त तक तेजी से बढ़कर 2.9 लाख हेक्टेयर हो गया है, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह रकबा 1.94 लाख हेक्टेयर था।

बढ़ेगी इनकम

उन्होंने कहा कि किसानों और व्यापारियों के पास अभी भी करीब 38 लाख टन प्याज का भंडारण है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि एमईपी हटाने और निर्यात शुल्क 40 प्रतिशत से घटाकर 20 प्रतिशत करने से प्याज का अधिक मात्रा में निर्यात किया जा सकेगा। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, “इस फैसले से किसानों और निर्यातकों की आय बढ़ेगी और कृषि क्षेत्र में कारोबार को काफी बढ़ावा मिलेगा।” बासमती चावल पर एमईपी हटाने के बारे में मंत्री ने कहा कि इससे निर्यात और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।

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