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गोबरधन योजना से देश का गैस आयात बिल 5 अरब डॉलर घटने की उम्मीद, IBA ने समझाया गणित

 Written By: Sunil Chaurasia
 Published : Aug 09, 2026 01:01 pm IST,  Updated : Aug 09, 2026 01:01 pm IST

IBA ने कहा कि ये योजना से ऊर्जा क्षेत्र के अलावा ग्रामीण विकास, कृषि उत्पादकता, रोजगार और पर्यावरण के क्षेत्र में भी व्यापक लाभ मिलने की उम्मीद है।

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गैस आयात बिल 5 अरब डॉलर घटने की उम्मीद Image Source : IBA

भारतीय बायोगैस संघ (IBA) का मानना है कि सरकार की 23,731 करोड़ रुपये की 'गोबरधन' योजना आने वाले सालों में देश के प्राकृतिक गैस आयात बिल को करीब 5 अरब डॉलर तक कम करने में मदद कर सकती है। ये योजना कृषि अवशेष, गोबर और अन्य जैविक कचरे को स्वच्छ ऊर्जा में बदलने पर केंद्रित है। आईबीए के अनुसार, हाल में मंजूर की गई गोबरधन (गैल्वानाइजिंग ऑर्गेनिक बायो-एग्रो रिसोर्सेज धन) योजना को केवल सरकारी खर्च के रूप में नहीं, बल्कि एक रणनीतिक राष्ट्रीय निवेश के तौर पर देखा जाना चाहिए। 

प्राकृतिक गैस की जरूरत का करीब 50 प्रतिशत आयात करता है भारत

IBA ने कहा कि ये योजना से ऊर्जा क्षेत्र के अलावा ग्रामीण विकास, कृषि उत्पादकता, रोजगार और पर्यावरण के क्षेत्र में भी व्यापक लाभ मिलने की उम्मीद है। संघ ने कहा कि इस योजना से सबसे बड़ा आर्थिक लाभ प्राकृतिक गैस के आयात में कमी के रूप में सामने आ सकता है। भारत अपनी प्राकृतिक गैस की जरूरत का करीब 50 प्रतिशत आयात करता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक परिस्थितियों का असर अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। 

वित्त वर्ष 2024-25 में 15.2 अरब डॉलर का बना था गैस आयात बिल

आईबीए के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में एलएनजी का आयात बिल करीब 15.2 अरब डॉलर रहा था। संघ का अनुमान है कि आने वाले सालों में अगर करीब 1,500 कम्प्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) प्लांट पूरी क्षमता के साथ संचालित होते हैं, तो प्राकृतिक गैस आयात से जुड़े व्यापार घाटे में करीब एक-तिहाई की कमी लाई जा सकती है। इससे लगभग 5 अरब डॉलर (लगभग 40 लाख करोड़ रुपये) की बचत संभव है। 

उर्वरक आयात के बिल में भी गिरावट संभव

आईबीए ने कहा कि योजना से उर्वरक आयात और सरकार पर सब्सिडी के बोझ को कम करने में भी मदद मिल सकती है। वित्त वर्ष 2024-25 में उर्वरक आयात का बिल करीब 18 अरब डॉलर रहा था। आईबीए का अनुमान है कि 1,500 सीबीजी प्लांट के संचालन और बेहतर कृषि पद्धतियों को अपनाने से उर्वरक आयात में कम से कम 5 प्रतिशत की कमी लाई जा सकती है। इससे चालू खाते के घाटे में करीब एक अरब डॉलर की कमी आ सकती है। 

ग्रामीण क्षेत्रों में पैदा होंगी नौकरियां

संघ ने कहा कि गोबरधन योजना से खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इससे कुशल और अर्द्ध-कुशल श्रमिकों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा।

PTI Inputs

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