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सरकार ने दुकानदारों के लिए गेहूं भंडारण की नई लिमिट तय की, कीमतों को बढ़ने से रोकने में मिलेगी मदद

Edited By: Pawan Jayaswal Published : Feb 20, 2025 11:48 pm IST, Updated : Feb 20, 2025 11:49 pm IST

गेहूं की कीमतों को काबू में रखने के लिए केंद्र सरकार ने 31 मार्च, 2025 तक लागू गेहूं की भंडारण सीमा को संशोधित करने का फैसला किया है।

गेहूं- India TV Paisa
Photo:FILE गेहूं

केंद्र सरकार ने गुरुवार को कीमतों को कंट्रोल में रखने के लिए थोक विक्रेताओं, खुदरा विक्रेताओं और प्रोसेसिंग करने वालों के लिए गेहूं भंडारण की सीमा सख्त कर दी। सरकार ने साथ ही कहा कि देश में खाद्यान्न का पर्याप्त भंडार है। गेहूं की नयी फसल की कटाई मार्च के अंत से शुरू होती है। सरकार ने कहा कि 31 मार्च तक लागू रहने वाली संशोधित भंडारण सीमा के अनुसार व्यापारी/थोक विक्रेता केवल 250 टन गेहूं रख सकते हैं। पहले के मानदंड के अनुसार यह सीमा 1,000 टन थी। खुदरा विक्रेताओं के लिए भंडारण की सामा को पांच टन से घटाकर चार टन कर दिया गया है।

हर शुक्रवार को देनी होगी जानकारी

एक आधिकारिक बयान में कहा गया, ‘‘गेहूं की कीमतों को काबू में रखने के लिए केंद्र सरकार ने 31 मार्च, 2025 तक लागू गेहूं की भंडारण सीमा को संशोधित करने का फैसला किया है।’’ बड़ी चेन वाले खुदरा विक्रेताओं के संदर्भ में प्रत्येक आउटलेट के लिए भंडारण सीमा चार टन होगी। इसी तरह गेहूं की प्रोसेसिंग करने वाले अप्रैल, 2025 तक मासिक स्थापित क्षमता (MIC) का 50 प्रतिशत रख सकते हैं। गेहूं का भंडारण करने वाली सभी इकाइयों को गेहूं भंडार सीमा पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना और हर शुक्रवार को भंडार की स्थिति की जानकारी देना जरूरी है। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने कहा कि वह देश में कीमतों को नियंत्रित करने और उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए गेहूं के भंडार की स्थिति पर कड़ी नजर रख रहा है।

खाद्य तेलों के भाव बढ़े

उधर देशी तेल-तिलहन के दाम एमएसपी से कम रहने के कारण किसानों द्वारा मंडियों में कम आवक लाने तथा आगामी त्योहारों की मांग के कारण गुरुवार को घरेलू तेल-तिलहन बाजार में सभी तेल-तिलहन कीमतों में मजबूती दिखी। मलेशिया एक्सचेंज में मामूली गिरावट है जबकि शिकागो एक्सचेंज भी बढ़त में है। बाजार सूत्रों ने कहा कि देशी तेल-तिलहनों के दाम एमएसपी से कम होने के बीच किसान अपनी उपज मंडियों में कम मात्रा में ला रहे हैं। देश में सूरजमुखी का दाम महंगा होने से इसकी खपत प्रभावित है। इसी तरह पामोलीन तेल का दाम इस बार सरसों, सोयाबीन से भी अधिक है। ऐसी स्थिति में बिनौला तेल पर आपूर्ति का दबाव है और नमकीन बनाने वाली कंपनियों के बीच इस तेल की मांग बढ़ रही है।

(पीटीआई/भाषा)

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