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HAL ने इस कंपनी के साथ की ₹8870 करोड़ की डील, तेजस विमानों के लिए खरीदेगी 113 जेट इंजन

Edited By: Sunil Chaurasia Published : Nov 08, 2025 04:03 pm IST, Updated : Nov 08, 2025 04:03 pm IST

रक्षा मंत्रालय ने सितंबर महीने में एचएएल के साथ 62,370 करोड़ रुपये की डील की था। इस समझौते के तहत भारतीय वायु सेना के लिए 97 तेजस MK-1A विमानों की खरीद की जाएगी।

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Photo:HAL रक्षा मंत्रालय ने सितंबर में एचएएल के साथ की थी 62,370 करोड़ रुपये की डील

हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने अमेरिकी डिफेंस कंपनी GE Aerospace के साथ एक बड़ी डील की है। HAL अपने तेजस हल्के लड़ाकू विमान (LCA) प्रोग्राम के लिए 113 जेट इंजनों की खरीद का बड़ी डील की है। ये समझौता भारतीय उत्पादों के आयात पर अमेरिका में 50 प्रतिशत कस्टम ड्यूटी लगाए जाने से दोनों देशों के संबंधों में आए तनाव के बीच हुआ है। अधिकारियों ने शुक्रवार को कहा कि F-404 GE-IN20 इंजन की डिलीवर 2027 से शुरू होकर 2032 तक पूरी की जाएगी। इस डील की वैल्यू लगभग 1 अरब डॉलर (करीब 8,870 करोड़ रुपये) रहने का अनुमान है। 

रक्षा मंत्रालय ने सितंबर में एचएएल के साथ की थी 62,370 करोड़ रुपये की डील

एचएएल ने कहा कि उसने एलसीए तेजस MK-1A के 97 विमानों के निर्माण कार्यक्रम के लिए इंजन और सहयोगी पैकेज की आपूर्ति के लिए जनरल इलेक्ट्रिक कंपनी (GE) के साथ ये करार किया है। रक्षा मंत्रालय ने सितंबर महीने में एचएएल के साथ 62,370 करोड़ रुपये की डील की था। इस समझौते के तहत भारतीय वायु सेना के लिए 97 तेजस MK-1A विमानों की खरीद की जाएगी। ‘तेजस’ सिंगल इंजन वाला बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान है, जिसे ज्यादा खतरे वाले एयर मिशन के लिए डिजाइन किया गया है। ये वायु रक्षा, समुद्री टोही अभियान और हमला करने जैसे अभियानों को अंजाम देने में सक्षम है। 

तेजस विमानों की समय पर डिलीवरी चाहती है भारतीय वायु सेना

एचएएल जीई F-404 इंजन का इस्तेमाल LCA MK-1A विमानों के पहले बैच में भी कर रही है। रक्षा मंत्रालय ने फरवरी, 2021 में एचएएल के साथ 48,000 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट साइन किया था, जिसके तहत 83 तेजस MK-1A विमान खरीदे जाने थे। हालांकि, जीई एयरोस्पेस द्वारा इंजन की डिलीवरी में देरी के कारण इन विमानों की सप्लाई में रुकावट आई। सूत्रों ने कहा कि वायु सेना वर्तमान में अपने लड़ाकू विमानों के फ्लीट की घटती संख्या की भरपाई के लिए तेजस विमानों की समय पर डिलीवरी चाहती है। फिलहाल, वायुसेना के पास 31 स्क्वाड्रन हैं, जबकि उसकी अधिकृत संख्या 42 स्क्वाड्रन की है।

पीटीआई इनपुट्स के साथ

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