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IDFC First Bank की चंडीगढ़ शाखा में ₹590 करोड़ घोटाले का शक, हरियाणा सरकार से जुड़े खातों में गड़बड़ी

 Edited By: Sourabha Suman
 Published : Feb 22, 2026 12:02 pm IST,  Updated : Feb 22, 2026 12:02 pm IST

आईडीएफसी बैंक को अपने चार कर्मचारियों पर शक है, जिसके आधार पर फिलहाल उन्हें सस्पेंड कर दिया गया है। ये कर्मचारी हरियाणा राज्य सरकार से जुड़े खातों को संभाल रहे थे।

बैंक ने अपने नियामक को मामले की सूचना दे दी है। - India TV Hindi
बैंक ने अपने नियामक को मामले की सूचना दे दी है। Image Source : PIXABAY

चंडीगढ़ स्थित IDFC First Bank की एक शाखा में ₹590 करोड़ की कथित वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। बैंक ने 21 फरवरी को स्टॉक एक्सचेंज को दी गई सूचना में खुलासा किया कि शाखा के चार कर्मचारियों पर इस संदिग्ध घोटाले में संलिप्त होने का शक है। livemint की खबर के मुताबिक, बैंक का कहना है कि, प्रारंभिक आंतरिक जांच में कुछ कर्मचारियों द्वारा धोखाधड़ी से जुड़ी गतिविधियों के संकेत मिले हैं। मामले में अन्य व्यक्तियों या संस्थाओं की संभावित मिलीभगत की भी जांच की जा रही है।

कैसे हुआ घोटाले का खुलासा?

बैंक ने बताया कि यह मामला तब सामने आया जब हरियाणा सरकार के एक विभाग ने अपना खाता बंद करने और उसमें मौजूद धनराशि को दूसरे बैंक में ट्रांसफर करने का अनुरोध किया। खाता बंद करने की प्रक्रिया के दौरान खाते में दर्ज बैलेंस और विभाग द्वारा बताए गए बैलेंस में अंतर पाया गया। इसके बाद 18 फरवरी से हरियाणा सरकार से जुड़ी अन्य इकाइयों ने भी अपने खातों को लेकर बैंक से संपर्क किया। जांच के दौरान इन खातों में भी इसी तरह की विसंगतियां सामने आईं। बैंक ने स्पष्ट किया है कि यह मामला केवल चंडीगढ़ शाखा में संचालित हरियाणा सरकार से जुड़े एक विशेष समूह के खातों तक सीमित है। शाखा के अन्य ग्राहकों के खातों पर इसका कोई असर नहीं पड़ा है।

कितनी राशि संदिग्ध?

संबंधित खातों के सामंजस्य के दौरान लगभग ₹590 करोड़ की राशि संदिग्ध पाई गई है। हालांकि, कथित फ्रॉड की सटीक समयावधि अभी स्पष्ट नहीं है। बैंक ने कहा है कि इसका निर्धारण स्वतंत्र बाहरी जांच के बाद किया जाएगा।

किन पर है संदेह?

फाइलिंग के मुताबिक, प्रथम दृष्टया संलिप्त व्यक्ति चंडीगढ़ शाखा में तैनात वे कर्मचारी हैं जो हरियाणा राज्य सरकार से जुड़े खातों को संभाल रहे थे। बैंक ने यह भी संकेत दिया है कि इस मामले में अन्य बाहरी व्यक्तियों या काउंटरपार्टी की संभावित भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता। बैंक का कहना है कि वास्तविक वित्तीय प्रभाव का आकलन आगे की जांच, दावों के सत्यापन और संभावित रिकवरी के बाद ही किया जाएगा।

बैंक ने अब तक क्या कार्रवाई की?

नियामकीय और कानूनी कदम उठाए हैं। बैंक ने अपने नियामक को मामले की सूचना दे दी है। पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है। अन्य संबंधित कानून प्रवर्तन एजेंसियों को भी शिकायत भेजी जा रही है। जांच एजेंसियों को पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन दिया गया है। बैंक ने एक स्वतंत्र बाहरी एजेंसी नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जो मामले की फोरेंसिक ऑडिट करेगी। साथ ही वैधानिक ऑडिटरों को भी सूचित कर दिया गया है।

आंतरिक कार्रवाई

बैंक की तरफ से चार संदिग्ध अधिकारियों को जांच पूरी होने तक निलंबित कर दिया गया है। दोषी पाए जाने पर संबंधित कर्मचारियों और अन्य व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक, सिविल और आपराधिक कार्रवाई की जाएगी। 20 फरवरी को फ्रॉड मामलों की निगरानी के लिए गठित बोर्ड की विशेष समिति की बैठक बुलाई गई। 21 फरवरी को ऑडिट कमेटी और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक कर मामले की जानकारी साझा की गई। बैंक ने कुछ लाभार्थी बैंकों को रिकॉल अनुरोध भेजकर संदिग्ध खातों में उपलब्ध राशि पर लियन मार्क करने का अनुरोध किया है।

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