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India-EU डील में क्या-क्या है खास, समझें कैसे दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए है वरदान

 Edited By: Sourabha Suman
 Published : Jan 27, 2026 01:54 pm IST,  Updated : Jan 27, 2026 02:16 pm IST

भारत और EU के बीच मौजूदा समय में सालाना 180 अरब यूरो से अधिक का व्यापार होता है। इस डील से यूरोप के साथ-साथ भारतीय ग्राहकों को भी बड़ा फायदा मिलने वाला है।

मंगलवार, 27 जनवरी, 2026 को नई दिल्ली में हैदराबाद हाउस में अपनी मीटिंग के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र- India TV Hindi
मंगलवार, 27 जनवरी, 2026 को नई दिल्ली में हैदराबाद हाउस में अपनी मीटिंग के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूरोपियन काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा और यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन। Image Source : AFP

भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने मंगलवार को एक ऐतिहासिक, महत्वाकांक्षी और व्यावसायिक रूप से बेहद अहम मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत पूरी कर ली। यह अब तक दोनों पक्षों द्वारा किया गया सबसे बड़ा व्यापार समझौता है। ऐसे समय में जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों और बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनावों का सामना कर रही है, यह डील आर्थिक खुलेपन और नियम-आधारित वैश्विक व्यापार के प्रति भारत और EU की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

भारतीय खरीदारों को क्या मिलेगा सस्ता?

औद्योगिक और तकनीकी उत्पाद होंगे सस्ते

  • केमिकल्स: EU से आने वाले केमिकल उत्पादों पर लगने वाली 22% तक की इंपोर्ट ड्यूटी ज्यादातर मामलों में खत्म कर दी जाएगी, जिससे व्यापक उत्पाद रेंज सस्ती होगी।
  • मशीनरी: यूरोपीय मशीनरी पर 44% तक के ऊंचे टैरिफ बड़े पैमाने पर हटाए जाएंगे। इससे कैपिटल गुड्स और इंडस्ट्रियल इनपुट की लागत घटेगी।
  • फार्मास्यूटिकल्स: EU फार्मा उत्पादों पर लगने वाली 11% तक की ड्यूटी लगभग पूरी तरह समाप्त कर दी जाएगी।
  • मेडिकल और सर्जिकल उपकरण: करीब 90% ऑप्टिकल, मेडिकल और सर्जिकल उपकरण ड्यूटी-फ्री हो जाएंगे, जिससे हेल्थकेयर खर्च कम होने की उम्मीद है।
  • विमान और अंतरिक्ष यान: इस श्रेणी के लगभग सभी उत्पादों पर टैरिफ समाप्त किए जाएंगे, जिससे एविएशन और स्पेस सेक्टर को बड़ा फायदा मिलेगा।

ऑटोमोबाइल सेक्टर में भी राहत

यूरोपीय कारें: EU से आने वाली कारों पर टैरिफ को चरणबद्ध तरीके से घटाकर 10% किया जाएगा। यह सुविधा सालाना 2.5 लाख वाहनों के कोटे के तहत मिलेगी, जिससे प्रीमियम आयातित कारें पहले से ज्यादा किफायती हो सकती हैं।

खाने-पीने की चीज़ों पर भी असर

  • जैतून का तेल, मार्जरीन और चुनिंदा वनस्पति तेलों पर टैरिफ कम या पूरी तरह खत्म होंगे।
  • फलों के रस और प्रोसेस्ड फूड उत्पादों पर इंपोर्ट ड्यूटी हटाई जाएगी।
  • बीयर पर टैरिफ घटाकर 50% कर दिया जाएगा।
  • वाइन पर ड्यूटी घटकर 20–30% के दायरे में आ जाएगी।

कुल व्यापार पर असर

इस समझौते के तहत भारत में EU के 90% से अधिक निर्यातित उत्पादों पर कम या शून्य टैरिफ लागू होंगे। अनुमान है कि इससे यूरोपीय निर्यातकों को सालाना करीब €4 बिलियन की बचत होगी, जिसका सीधा लाभ भारतीय उपभोक्ताओं और घरेलू उद्योगों को सस्ती कीमतों और बेहतर इनपुट लागत के रूप में मिलने की संभावना है।

भारत-ईयू में सालाना 180 अरब यूरो से अधिक का व्यापार

वर्तमान में भारत और EU के बीच सालाना 180 अरब यूरो से अधिक का व्यापार होता है, जिससे लगभग 8 लाख EU नौकरियों को समर्थन मिलता है। इस समझौते के तहत भारत में EU के 96.6% उत्पादों पर टैरिफ घटाए या समाप्त किए जाएंगे, जिससे अनुमान है कि 2032 तक EU के भारत में निर्यात में दोगुनी बढ़ोतरी होगी। टैरिफ कटौती से यूरोपीय उत्पादों पर सालाना करीब 4 अरब यूरो की ड्यूटी बचत होने की उम्मीद है।

भारत की अब तक की सबसे बड़ी व्यापारिक रियायत

यह समझौता भारत द्वारा किसी भी ट्रेड पार्टनर को दी गई अब तक की सबसे बड़ी व्यापारिक छूट है। इससे EU की इंडस्ट्रियल और एग्री-फूड कंपनियों को 1.45 अरब की आबादी वाले दुनिया के सबसे तेज़ी से बढ़ते बड़े बाज़ार तक विशेष पहुंच मिलेगी, जिसकी GDP करीब 3.4 ट्रिलियन यूरो है।

यूरोपीय कंपनियों को मिलेगा बड़ा फायदा

  • भारत ने EU को वे टैरिफ रियायतें दी हैं, जो किसी अन्य साझेदार को नहीं मिलीं।
  • कारों पर टैरिफ 110% से घटकर चरणबद्ध तरीके से 10% तक
  • ऑटो पार्ट्स पर टैरिफ पूरी तरह समाप्त (5–10 साल में)
  • मशीनरी (44%), केमिकल्स (22%) और फार्मा (11%) पर अधिकांश टैरिफ खत्म
  • छोटे और मझोले यूरोपीय कारोबार (SMEs) के लिए एक अलग अध्याय रखा गया है, ताकि वे नई निर्यात संभावनाओं का पूरा लाभ उठा सकें। 
  • दोनों पक्ष SMEs के लिए डेडिकेटेड हेल्पडेस्क और संपर्क बिंदु स्थापित करेंगे।
  • कृषि-खाद्य उत्पादों पर टैरिफ में बड़ी कटौती
  • समझौते के तहत EU के कृषि और खाद्य उत्पादों पर भारत के औसतन 36% से अधिक टैरिफ घटाए या हटाए जाएंगे।
  • वाइन पर टैरिफ 150% से घटकर पहले 75% और बाद में 20% तक
  • ऑलिव ऑयल पर टैरिफ 45% से घटकर शून्य (5 साल में)
  • ब्रेड और कन्फेक्शनरी जैसे प्रोसेस्ड फूड पर 50% तक टैरिफ खत्म
  • हालांकि, EU के संवेदनशील कृषि सेक्टर (बीफ, चिकन, चावल और चीनी) को पूरी तरह संरक्षण दिया गया है और भारतीय आयात पर EU के कड़े स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा नियम लागू रहेंगे।
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