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इनडायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में बना रिकॉर्ड, FY2026 में सरकार ने वसूले ₹15.52 लाख करोड़, टारगेट से भी ज्यादा

 Published : Apr 02, 2026 03:39 pm IST,  Updated : Apr 02, 2026 11:16 pm IST

FY2026 में अप्रत्यक्ष कर संग्रह मजबूत रहा, जिसमें कस्टम और एक्साइज ड्यूटी ने शानदार प्रदर्शन किया, जबकि नए पान मसाला सेस को अभी और समय की जरूरत है।

एक्साइज ड्यूटी संग्रह 101 प्रतिशत रहा।- India TV Hindi
एक्साइज ड्यूटी संग्रह 101 प्रतिशत रहा। Image Source : FREEPIK

वित्त वर्ष 2025-26 में केंद्र सरकार ने अप्रत्यक्ष कर संग्रह का लक्ष्य थोड़ा सा पार कर लिया है। एक आधिकारिक सूत्र ने गुरुवार को यह जानकारी दी।संशोधित अनुमान (RE) के मुताबिक, इस वित्त वर्ष में कुल अप्रत्यक्ष कर संग्रह ₹15.52 लाख करोड़ से अधिक रहने की उम्मीद थी। इसमें कस्टम ड्यूटी ₹2.58 लाख करोड़, एक्साइज ड्यूटी ₹3.38 लाख करोड़ और केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) ₹9.58 लाख करोड़ शामिल था।

वास्तविक आंकड़ों के अनुसार

कस्टम ड्यूटी संग्रह संशोधित अनुमान का 102 प्रतिशत रहा। एक्साइज ड्यूटी संग्रह 101 प्रतिशत रहा। CGST संग्रह 100.8 प्रतिशत रहा। कुल मिलाकर GST और नॉन-GST अप्रत्यक्ष कर संग्रह संशोधित अनुमान का 101.2 प्रतिशत रहा। हालांकि, एक क्षेत्र में लक्ष्य से काफी पीछे रहना पड़ा। बीते कई साल से इनडायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में बढ़ोतरी का रुझान देखने को मिला है।

स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा सेस से कितना रहा कलेक्शन

स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा सेस से ₹2,330 करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन वास्तविक संग्रह केवल 63 प्रतिशत ही हो सका। यह सेस पान मसाला बनाने वाली इकाइयों पर उनकी उत्पादन क्षमता के आधार पर लगाया जाता है। इसे 1 फरवरी 2026 से लागू किया गया था और यह 40 प्रतिशत की सर्वोच्च GST दर के अतिरिक्त है। सरकारी अधिकारी ने बताया कि चालू वित्त वर्ष (2026-27) में इस सेस के संग्रह में सुधार की उम्मीद है, क्योंकि नई व्यवस्था धीरे-धीरे स्थिर हो रही है। सरकार ने इस वर्ष इस सेस से ₹14,000 करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखा है।

इनडायरेक्ट टैक्स क्या होता है? 

अप्रत्यक्ष कर (इनडायरेक्ट टैक्स) वह टैक्स होता है जो वस्तुओं और सेवाओं के उपभोग पर लगाया जाता है। यह टैक्स सीधे किसी व्यक्ति की इनकम पर नहीं लगाया जाता है। इसके बजाय, उपभोक्ता जब कोई वस्तु या सेवा खरीदता है, तो उसे उसकी कीमत के साथ यह टैक्स भी चुकाना पड़ता है। विक्रेता इस टैक्स (कर) को सरकार के पास जमा करता है। इस प्रकार, अप्रत्यक्ष कर में टैक्स का भुगतान करने वाला व्यक्ति और टैक्स का वास्तविक भार उठाने वाला व्यक्ति अलग-अलग होते हैं। उदाहरण के तौर पर, जीएसटी एक प्रमुख अप्रत्यक्ष कर है, जो वस्तुओं और सेवाओं की खरीद पर लगाया जाता है।

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